मुंबई। मानव तस्करी और अवैध प्रवास की चौंकाने वाली साजिश का पर्दाफाश करते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने गोवा स्थित एक शिपिंग कंपनी के निदेशक को गिरफ्तार किया है। आरोपी का नाम अजय शिरोडकर बताया गया है, जो कथित तौर पर कबूतरबाजी के बड़े नेटवर्क को संचालित कर रहा था। रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शिरोडकर को आव्रजन विभाग ने रोका और बाद में उसे मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया।
बैंकॉक जाने की कोशिश में हुआ गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, शिरोडकर बैंकॉक के लिए उड़ान भरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसके खिलाफ जारी एक लुकआउट नोटिस के आधार पर आव्रजन अधिकारियों ने उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से सात मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, जाली शिप-जॉइनिंग लेटर, ई-माइग्रेशन दस्तावेज और अन्य संदिग्ध फाइलें बरामद की गईं। पुलिस का मानना है कि आरोपी इन दस्तावेजों का इस्तेमाल लोगों को विदेश भेजने के लिए करता था।
FRRO ने पहले ही दी थी चेतावनी
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चेन्नई स्थित FRRO (विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय) ने शिरोडकर के खिलाफ एक लुकआउट नोटिस जारी किया था। यह नोटिस इस संदेह के आधार पर जारी हुआ था कि आरोपी थाईलैंड और मैक्सिको के रास्ते प्रवासियों को अवैध रूप से अमेरिका और ब्रिटेन भेजने की कोशिश में शामिल है।
फर्जीवाड़े का तरीका
जांच में सामने आया है कि शिरोडकर ने अपनी कंपनी शिरोडकर ओसियन एंप्लॉयर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से फर्जी दस्तावेज बनाने का नेटवर्क तैयार किया था। वह प्रवासियों को विदेश में जहाजों पर नौकरी का झांसा देता और इसके एवज में प्रति व्यक्ति 1 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक वसूलता था। इन लोगों को दिखावे के लिए फर्जी सीफेरिंग (समुद्री नाविक) प्रमाणपत्र और शिप-जॉइनिंग लेटर दिए जाते थे। इसके बाद उन्हें पंजाब, हरियाणा, मैक्सिको और अमेरिका में मौजूद सहयोगियों की मदद से गैरकानूनी तरीके से अमेरिका और यूके भेजा जाता था।
लैपटॉप से मिले पुख्ता सबूत
क्राइम ब्रांच ने शिरोडकर के लैपटॉप की जांच की तो उसमें कई फर्जी प्रमाणपत्र और प्रवासियों से संबंधित दस्तावेज मिले। पुलिस का कहना है कि यह दस्तावेज इस बात का सबूत हैं कि आरोपी लंबे समय से इस कबूतरबाजी रैकेट को चला रहा था।
अदालत में पेश, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद शिरोडकर को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
कबूतरबाजी का पुराना जाल
भारत में कबूतरबाजी यानी लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने का धंधा नया नहीं है। खासकर पंजाब और हरियाणा में यह धंधा वर्षों से फल-फूल रहा है। बेरोजगारी और विदेश जाकर जल्दी पैसा कमाने के सपने के चलते लोग कबूतरबाजों के जाल में फंस जाते हैं। शिरोडकर जैसे लोग इसी मानसिकता का फायदा उठाकर लाखों रुपये ऐंठते हैं और प्रवासियों को खतरनाक रास्तों से विदेशी जमीन पर भेजते हैं।
मुंबई क्राइम ब्रांच अब यह जांच कर रही है कि शिरोडकर के साथ कितने और लोग इस नेटवर्क में शामिल हैं। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी हो सकते हैं। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर लिया है, जिनसे और भी अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
अवैध प्रवासियों पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रवासियों की जान को गंभीर खतरा होता है। उन्हें गैरकानूनी रास्तों से सीमाओं को पार कराना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि उनकी जान जोखिम में डालता है। कई बार अवैध प्रवासियों को बीच रास्ते में छोड़ दिया जाता है या उन्हें अपराधी गिरोहों के हाथों बेच दिया जाता है।
पुलिस की चेतावनी
मुंबई क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी या विदेश भेजने वाले एजेंट से पैसे देने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें। पुलिस ने साफ कहा है कि इस तरह के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
