जौनपुर। बुधवार का दिन जिले के लिए भयावह साबित हुआ। आसमान से गिरी आफ़त ने तीन परिवारों की खुशियाँ छीन लीं और पूरे गाँव को मातम के सागर में डुबो दिया। आकाशीय बिजली की चपेट में आकर दो मासूम बच्चों और एक किसान की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में घटी, जिसने ग्रामीणों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गौर गाँव में सुबह हल्की बारिश हो रही थी। बच्चे खेलकूद में मशगूल थे। इसी बीच 14 वर्षीय किशन बनवासी और 12 वर्षीय अतुल बनवासी पास के शीशम के पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो गए। शायद उन्हें लगा कि बारिश से बचने का यह सबसे आसान उपाय है। लेकिन किसी को पता नहीं था कि यही पेड़ उनकी जिंदगी का आखिरी ठिकाना बन जाएगा। अचानक तेज़ गर्जना के साथ आसमान से बिजली गिरी और दोनों मासूम वहीं ढेर हो गए। उनकी चीख़ भी न निकल सकी। कुछ ही पलों में खेल का मैदान मातम में बदल गया। जहां कुछ देर पहले बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहां अब सिर्फ़ मातमी चीखें सुनाई दे रही थीं।
गाँव के लोगों ने आनन-फानन में दोनों बच्चों को उठाकर अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। बच्चों की मौत की खबर सुनते ही गाँव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जो परिवार अभी तक अपने बच्चों के भविष्य के सपने देख रहा था, अब उन सपनों की जगह केवल दर्द और सन्नाटा रह गया है।
वहीं दूसरी दर्दनाक घटना खेतासराय थाना क्षेत्र के नोनारी भुड़कुड़हा गाँव में हुई। यहां 50 वर्षीय किसान बहादुर रोज़ की तरह खेतों में काम करने निकले थे। बारिश के बीच वे अपनी फसल की देखभाल में जुटे थे कि अचानक आकाशीय बिजली उन पर गिर गई। पास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और दौड़कर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। परिवारजन भी उम्मीद लगाए बैठे थे कि शायद समय रहते इलाज मिल जाए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। डॉक्टरों ने बहादुर को मृत घोषित कर दिया।
खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बहादुर के परिवार में मातमी सन्नाटा छा गया। पत्नी और बच्चों की चीखें सुनकर गाँव का हर शख्स आंसू बहाने लगा। खेतों में मेहनत करने वाला, परिवार का सहारा अचानक मौत के मुंह में चला गया।
लगातार बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। लोग सहमे हुए हैं और घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात के मौसम में ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
गाँव के बुजुर्गों का मानना है कि बच्चों को बारिश में खुले मैदान या पेड़ों के नीचे जाने से रोकना चाहिए। वहीं खेतों में काम करने वाले किसानों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन असलियत यह है कि जब तक बिजली गिरती है, तब तक किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिलता।
इन तीन मौतों ने न सिर्फ़ परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे गाँव और आसपास के क्षेत्रों को गम और दहशत के साए में धकेल दिया है। गाँव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर किसी की आंखें नम हैं।
