पालघर। पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका के कुर्जे गांव में गुरुवार को उस समय तनाव फैल गया, जब ग्रामीणों ने खवाड़ा विद्युत परियोजना से जुड़े वाहनों को जबरन रोक लिया। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। इस हमले में पुलिस कर्मियों को चोटें आईं और स्थिति कुछ समय के लिए पूरी तरह बेकाबू हो गई।
सूचना के अनुसार, विक्रमगढ़ पुलिस स्टेशन को खबर मिली थी कि गांव के पास खवाड़ा विद्युत परियोजना के वाहनों को कुछ ग्रामीणों ने रोका हुआ है। एपीआई गोले पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर वाहनों को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने कई बार सड़क खाली करने का अनुरोध किया, लेकिन ग्रामीण आक्रोशित होकर अपनी जगह पर डटे रहे। देखते ही देखते करीब 15–20 ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर अचानक हमला बोल दिया।
हमले के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस ने खुद को बचाने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया। तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने तीन हमलावरों—अकोल कातकरी, बड़कू रिंझाड़ और दिनेश रिंझाड़—को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 132, 189(2), 190, 191(2), 351(2), 352 और 126(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
घटना की जांच पीएसआई यशवंते को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच जारी खींचतान को उजागर कर दिया है।
गौरतलब है कि खवाड़ा विद्युत परियोजना को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से असंतोष है। परियोजना से प्रभावित लोगों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों और चिंताओं को नज़रअंदाज किया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते गुरुवार को उन्होंने वाहनों को गांव में रोक दिया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों को समय पर पूरा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। इस टकराव ने विक्रमगढ़ क्षेत्र में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है। अब देखना होगा कि पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति कितनी जल्दी सामान्य हो पाती है और क्या प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों को दूर करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाता है।