बेरोजगारी की ट्रेजडी! , चपरासी की जाॅब के लिए बी.टेक और पीएचडी होल्डर लगे लाइन में, 25 लाख बच्चों ने भरा फार्म

जयपुर। देश में बेरोजगारी का संकट किस हद तक गहराता जा रहा है, इसका ताजा उदाहरण राजस्थान में देखने को मिला। यहां चपरासी (फोर्थ ग्रेड कर्मचारी) की नौकरी पाने के लिए 25 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया, जबकि इन पदों के लिए न्यूनतम योग्यता सिर्फ 10वीं पास निर्धारित थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 25 लाख में से लगभग 85 प्रतिशत उम्मीदवार ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, बी.टेक और यहां तक कि पीएचडी होल्डर्स भी हैं।

53 हजार पदों के लिए 25 लाख आवेदन

राजस्थान में आठ साल बाद चपरासी भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है। 53,749 पदों के लिए करीब 24.75 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया। इनमें सिर्फ 10 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने 10वीं पास के आधार पर आवेदन किया। शेष 90 प्रतिशत उम्मीदवार ओवरक्वालिफाइड हैं। यह स्थिति बताती है कि पढ़े-लिखे युवाओं के पास बड़ी नौकरियों के अवसर लगभग खत्म हो चुके हैं और वे छोटे पदों के लिए भी मजबूरी में आवेदन कर रहे हैं।

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परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें

जयपुर समेत राजस्थान के 38 जिलों में 1,286 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हर पारी में लगभग 4.11 लाख अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं। जयपुर के गांधी नगर परीक्षा केंद्र पर भी यही नजारा दिखा। सुबह से ही केंद्रों के बाहर उम्मीदवारों की लंबी कतारें लगी थीं। इनमें से कई उम्मीदवार उच्च शिक्षा प्राप्त थे लेकिन चेहरा छुपाकर परीक्षा देने पहुंचे ताकि रिश्तेदारों या परिचितों को उनकी मजबूरी का पता न चल सके।

“जिस स्कूल में टीचर बनना था, वहीं पानी पिलाने को तैयार”

कई उम्मीदवारों ने अपनी व्यथा साझा की। गणित से एमएससी और बीएड कर चुके नरेंद्र बिजाणियां ने बताया कि वे पिछले पांच सालों से पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनों में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब अच्छी नौकरी की उम्मीद खत्म हो गई और उम्र तीस के पार जाने लगी, तो अब चपरासी की नौकरी के लिए भी तैयार हूं।”

दूसरे उम्मीदवारों ने कहा कि उन्होंने बीएड और बीएसटीसी इसलिए की थी ताकि वे टीचर बन सकें। लेकिन अब वे उसी स्कूल में घंटी बजाने और पानी पिलाने की नौकरी करने के लिए तैयार हैं।

पेपर लीक और घटते अवसर

राजस्थान में पिछले कुछ सालों से भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कई उम्मीदवारों का कहना है कि वे योग्य होने के बावजूद बार-बार पेपर लीक घोटाले की वजह से चयनित नहीं हो पाए। अब स्थिति यह है कि जब चपरासी की नौकरी की भर्ती निकली, तो उन्होंने भी आवेदन कर दिया।

बेरोजगारी का गहरा संकट

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति बेरोजगारी की गंभीर तस्वीर पेश करती है। एक तरफ लाखों शिक्षित युवा नौकरी की तलाश में हैं, दूसरी तरफ सरकारी भर्तियों की संख्या बेहद कम है। और जो भर्तियां निकलती हैं, उनमें गड़बड़ियां और पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं का भरोसा तोड़ देती हैं। राजस्थान में फोर्थ ग्रेड भर्ती की परीक्षा ने यह साफ कर दिया है कि देश में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा। यह स्थिति सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश में यही हाल है। अगर सरकारें समय रहते पारदर्शी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की पहल नहीं करतीं, तो लाखों पढ़े-लिखे युवा इसी तरह छोटी नौकरियों के लिए कतार में खड़े नजर आएंगे।

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