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बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त फैसला: एसआरए योजना में 410 घरों की अवैध बिक्री पर जांच और बेदखली के आदेश

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मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) योजनाओं में हो रही बड़े पैमाने की अवैधानिकताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने एसआरए की एक योजना में 804 झोपड़पट्टी निवासियों के लिए तैयार भवन में से 410 घरों की अवैध बिक्री को “चौंकाने वाला और अत्यंत अनुचित” बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अगर ये आरोप सही साबित हुए, तो अनधिकृत कब्जेदारों को तुरंत बेदखल करने और ऐसे घरों को एसआरए के पूल में शामिल करने की अनुमति दी गई है। यह फैसला न केवल एसआरए अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल उठाता है, बल्कि डेवलपरों की भूमिका की भी गहन जांच की मांग करता है।

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ताओं के आरोप

रिट याचिका संख्या 3088/2025 में याचिकाकर्ता मणिकम पलानीवेल देवेंद्र और अन्य ने एसआरए, महाराष्ट्र राज्य सरकार और संबंधित डेवलपरों के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे योग्य झोपड़पट्टी निवासी हैं, लेकिन योजना में बड़े पैमाने पर अवैध हस्तांतरण के कारण उन्हें वैकल्पिक स्थायी आवास नहीं मिल सका। योजना के तहत बनाए गए भवन को 7 जनवरी 2025 को आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी किया गया था, जो 804 झोपड़पट्टी निवासियों को आवंटित किया जाना था। लेकिन याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इनमें से 410 घर मूल निवासियों द्वारा अवैध रूप से बेच दिए गए।

अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं के दावे सही हैं, तो एसआरए का अपनी योजनाओं पर कोई वैधानिक नियंत्रण नहीं रह गया है। न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि ऐसे अवैध हस्तांतरण कैसे अनुमति दिए गए और समझौते पंजीकृत किए गए, इसकी जांच आवश्यक है। अदालत ने एसआरए अधिकारियों, डेवलपर और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ जांच शुरू करने की बात कही, जिसमें अधिकारियों को अंधेरे में रखने और डेवलपर की संलिप्तता की भूमिका शामिल है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को कुछ दस्तावेज सौंपे, जिनमें डिप्टी कलेक्टर (स्पेशल सेल) की 24 जून 2021 की चिट्ठी और एसआरए की डेवलपर को 22 दिसंबर 2014 की चिट्ठी शामिल हैं। इनमें योजना में अवैधानिकताओं का जिक्र है, जो अदालत ने एसआरए के वकीलों को सौंपने के निर्देश दिए।

अदालत के प्रमुख निर्देश

अदालत ने एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सख्त निर्देश जारी किए हैं:

– साइट दौरा और रिपोर्ट: सीईओ को मोतीलाल नेहरू नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (बीकेसी मामले) की तर्ज पर योजना स्थल का दौरा करना होगा। डेवलपर और एसआरए अधिकारियों से पूछताछ कर अवैध कब्जेदारों की संख्या, उनके डेटा और अन्य विवरणों वाली रिपोर्ट 1 अक्टूबर 2025 तक अदालत में पेश करनी होगी। डेवलपर को भी अवैध कब्जेदारों का डेटा अलग से जमा करने का आदेश दिया गया है।

– बेदखली की अनुमति: अगर जांच में बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन साबित हुए, तो सीईओ को कानूनी प्रक्रिया अपनाकर अनधिकृत कब्जेदारों को बेदखल करने की छूट दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों के विपरीत समझौते मान्य नहीं होंगे। अगर मूल योग्य आवंटी कानून के खिलाफ कार्य करते पाए गए, तो उन्हें कोई अधिकार नहीं मिलेगा, और ऐसे घर एसआरए के पूल में शामिल होकर परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) को आवंटित किए जा सकेंगे।

– एसआरए की आलोचना: अदालत ने एसआरए में “दिन-प्रतिदिन की अवैधानिकताओं” पर कड़ी फटकार लगाई। न्यायपीठ ने कहा कि एसआरए अधिकारियों की मिलीभगत से झोपड़पट्टी निवासी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं, जो व्यावसायीकरण को बढ़ावा देता है। सीईओ से अपील की गई कि वे अपना “घर दुरुस्त करें” और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता तंत्र स्थापित करें।

अदालत ने एसआरए को ऐसी अवैधानिकताओं को रोकने के लिए एक मजबूत नीति बनाने का सुझाव दिया, क्योंकि ये झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना के मूल उद्देश्य और कानून को ही विफल कर देती हैं। योजना का मकसद गरीब झोपड़पट्टी निवासियों को स्थायी आवास प्रदान करना है, न कि इसे व्यापारिक अवसर बनाना।

पहले के मामलों का संदर्भ

अदालत ने इस फैसले में पहले के एक मामले का हवाला दिया। रिट याचिका संख्या 1397/2024 (अहमद हुसैन बनाम एसआरए) में 8 अगस्त 2025 को दिए गए आदेश में अदालत ने ऐसी अवैधानिकताओं को “आंखें खोलने वाला” बताया था। उस मामले में भी एसआरए योजनाओं में अवैध बिक्री और हस्तांतरण पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले बार-बार अदालत पहुंच रहे हैं, जो एसआरए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

 सुनवाई में पक्षों की दलीलें

सुनवाई के दौरान:

– याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील शकील अहमद ने अवैधानिकताओं पर जोर दिया।

– राज्य सरकार की ओर से असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर (एजीपी) प्रशांत कांबले ने पैरवी की।

– एसआरए (रेस्पॉन्डेंट नंबर 2 से 4) की ओर से रवलीन सभरवाल, आरुषि यादव और स्मृति सजीव ने बहस की।

– रेस्पॉन्डेंट नंबर 5 की ओर से मिलिंद नार ने पक्ष रखा।

अदालत ने मामले को 1 अक्टूबर 2025 तक स्थगित कर दिया है, जब सीईओ की रिपोर्ट और एसआरए का स्वतंत्र हलफनामा पेश किया जाएगा। उसके आधार पर आगे के आदेश जारी होंगे। यह फैसला मुंबई की झोपड़पट्टी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एसआरए योजनाओं का दुरुपयोग रुकेगा और वास्तविक लाभार्थियों को न्याय मिलेगा।

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