बंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में एक अजीबोगरीब वैवाहिक विवाद सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। मामला सुहागरात और वैवाहिक संबंधों से जुड़ा है। यहां एक नवविवाहित महिला ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए उससे दो करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। महिला का कहना है कि शादी के बाद उसके पति ने न तो सुहागरात मनाई और न ही हफ्तों बाद तक उससे शारीरिक संबंध बनाए।
यह विवाद बंगलुरु के गोविंदराज नगर इलाके का है। आरोपित पति की पहचान प्रवीण के.एम. के रूप में हुई है, जो मूल रूप से चिकमंगलुरु जिले के तारिकेरे का निवासी है। उसकी शादी इस साल 5 मई 2025 को चंदना नामक युवती से हुई थी।
पत्नी का आरोप – पति है नपुंसक
पत्नी चंदना का कहना है कि विवाह के बाद उसने कई बार पति को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा, लेकिन प्रवीण ने कोई पहल नहीं की। उसने अदालत और पुलिस में यह दावा किया है कि उसके पति में शारीरिक क्षमता की कमी है, इसलिए वह नपुंसक है। यही कारण है कि वह वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा।
महिला का कहना है कि शादी के बाद भी जब पति ने कोई प्रयास नहीं किया, तो उसने परिजनों को यह बात बताई। इसके बाद पति की चुप्पी और दूरी को देखते हुए उसने मानसिक और सामाजिक अपमान का हवाला देते हुए दो करोड़ रुपये का मुआवजा मांग लिया।
पति का पलटवार – पत्नी और परिजन रच रहे साजिश
वहीं प्रवीण ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी और उसके परिवार वाले उसे झूठे आरोपों में फंसा रहे हैं। प्रवीण का दावा है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है और डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट भी इसका सबूत है।
प्रवीण के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया है कि शारीरिक संबंध न बनाने की वजह कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और झिझक थी। उन्होंने सलाह दी कि उसे शांत रहना चाहिए और तनाव कम करना चाहिए।
प्रवीण ने आरोप लगाया है कि 17 अगस्त को पत्नी और उसके रिश्तेदार उसके घर में घुसे और न केवल उसके साथ बल्कि उसके परिवार के साथ भी मारपीट की। इस घटना के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्रवीण का कहना है कि यह सब उसकी संपत्ति हड़पने की साजिश का हिस्सा है।
पुलिस जांच में जुटी
मामला पुलिस तक पहुंच चुका है। दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज की गई है और जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि यह विवाद वैवाहिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा है, इसलिए इसमें संवेदनशीलता बरती जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों और दोनों पक्षों के बयानों की जांच की जा रही है।
सामाजिक चर्चा में आया मामला
यह अनोखा विवाद अब सोशल मीडिया और समाज में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर कुछ लोग महिला के कदम को आवश्यक साहसिक कदम मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे अनुचित दबाव और पारिवारिक विवाद का निजी मामला कहकर खारिज कर रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय दंड संहिता और पारिवारिक कानून में पति-पत्नी के बीच वैवाहिक अधिकारों से जुड़े मामले बेहद जटिल होते हैं। ऐसे मामलों में अदालतें आमतौर पर दोनों पक्षों के मेडिकल सबूत, परिजनों की गवाही और मानसिक तनाव की परिस्थितियों का गहराई से अध्ययन करती हैं।