छत्रपति संभाजीनगर में बुधवार रात एक ऐसी भयावह वारदात सामने आई जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। सिल्क मिल कॉलोनी इलाके में फ्लाईओवर के नीचे रेलवे स्टेशन के पास एक रिक्शा चालक सैयद इमरान शफीक की उसके दो नाबालिग बेटों के सामने निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे की बताई जा रही है। इमरान अपने 13 वर्षीय बेटे अयान और तीन वर्षीय छोटे बेटे अजान के साथ रोज की तरह घर लौट रहे थे। जब वे फ्लाईओवर के नीचे पहुंचे, तभी एक कार ने उनके रिक्शे को रोक लिया। बताया जाता है कि कार में सवार पांच से छह लोग उतरे और पहले दोनों बच्चों को जबरन रिक्शे से नीचे उतार दिया। उसके बाद उन्होंने इमरान पर हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जब इमरान ने खुद को बचाने और हमलावरों से हथियार छीनने की कोशिश की, तो उन्होंने उसकी उंगलियां और दाहिनी कलाई काट दी। इसके बाद सिर और गर्दन पर बार-बार वार किए गए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह पूरी घटना उसके मासूम बेटों के सामने हुई, जो भय से चीखते और रोते रह गए, जबकि आसपास से गुजर रहे लोग कुछ देर तक समझ ही नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है।
मौके पर मौजूद कुछ राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। वहां का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए। चारों ओर खून फैला हुआ था और बच्चों की हालत डर और सदमे से जड़ जैसी हो गई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और बच्चों को परिजनों की देखरेख में सौंप दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इमरान का स्थानीय गैस सिलेंडर वितरण कारोबार से जुड़ा एक विवाद काफी समय से चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, इसी पुराने झगड़े की रंजिश में उसकी हत्या की गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। लोग सड़कों पर निकलने से हिचकिचाने लगे और स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें जल्दी बंद कर दीं।
पुलिस ने वारदात की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष दल गठित किया और संदिग्धों की तलाश शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें एक कार और कुछ संदिग्धों की गतिविधियां दर्ज मिलीं। इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने सघन जांच अभियान चलाया और केवल नौ घंटे के भीतर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पकड़े गए आरोपियों में मुजीब डॉन, उसका सगा भाई सद्दाम हुसैन मोइनुद्दीन और बहनोई शेख इरफान शेख सुलेमान शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि मुजीब डॉन के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह इलाके में अपराध की दुनिया में कुख्यात नाम के रूप में जाना जाता है। पुलिस अब उन अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है जो वारदात में शामिल थे या जिन्होंने योजना बनाने में सहयोग किया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्या की मुख्य वजह गैस सिलेंडर सप्लाई के कारोबार को लेकर पुराना विवाद था। इमरान और आरोपी पक्ष के बीच कई महीनों से तनातनी चल रही थी। आरोप है कि आरोपी पक्ष इमरान पर व्यवसाय से हटने का दबाव बना रहा था, लेकिन इमरान ने झुकने से इंकार कर दिया। इस कारण दोनों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार इस रंजिश ने खूनी रूप ले लिया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने पहले से साजिश रची थी और मौके का इंतजार कर रहे थे। बुधवार रात जब इमरान अपने बच्चों के साथ लौट रहा था, तब उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया।
वारदात के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है। आसपास के निवासियों ने बताया कि इमरान शांत स्वभाव का व्यक्ति था और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसका किसी से कोई निजी झगड़ा नहीं था, लेकिन व्यवसाय को लेकर चल रहे विवाद ने आखिरकार उसकी जान ले ली। पड़ोसियों ने बच्चों की हालत देखकर कहा कि इतनी क्रूरता की कल्पना करना भी मुश्किल है। एक पिता को उसके मासूम बच्चों के सामने इस तरह मौत के घाट उतार देना मानवता के लिए कलंक है। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा है। बच्चे लगातार सदमे में हैं और परिवार को सांत्वना देने के लिए लोग लगातार पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यह एक पूर्व नियोजित हमला था और आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जांच को प्राथमिकता दी है और सभी तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। फिलहाल गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ चल रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि घटना की योजना कब और कहां बनाई गई थी तथा अन्य कौन लोग इसमें शामिल थे। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों ने हत्या में धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिनकी बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
इस दिल दहला देने वाली वारदात ने संभाजीनगर शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि इलाके में गश्त या निगरानी व्यवस्था मजबूत होती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी है और रात के समय गश्त के आदेश जारी किए गए हैं। स्थानीय नागरिकों को भी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इमरान के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। उसकी पत्नी और बच्चे अब पूरी तरह असहाय स्थिति में हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार की सहायता के लिए कदम उठाने की बात कही है। नगर निगम के अधिकारियों ने भी परिवार को तात्कालिक आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया है।
यह घटना न केवल संभाजीनगर बल्कि पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए चेतावनी है कि स्थानीय विवाद और आपसी रंजिशें किस तरह भयावह रूप ले सकती हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी ने लोगों में कुछ हद तक भरोसा बहाल किया है, लेकिन घटना की क्रूरता ने नागरिकों के मन में असुरक्षा की गहरी भावना छोड़ दी है। बच्चे जो अपने पिता की हत्या के गवाह बने, उनके मन पर यह सदमा शायद जीवन भर न मिट सके। प्रशासन अब इस मामले को अदालत में मजबूत तरीके से पेश करने की तैयारी कर रहा है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और शहर में कानून का भय कायम रह सके।
संभाजीनगर की इस दर्दनाक वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपसी विवादों का हल हिंसा नहीं हो सकता। पुलिस की सतर्कता, समाज की जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान ही ऐसी घटनाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है। शहर के लोग अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी क्रूर हरकत करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर हो जाए।
