मुंबई। मुंबई के दक्षिणी हिस्से में स्थित ऐतिहासिक और घनी आबादी वाला क्षेत्र कामाठीपूरा अब अपनी पुरानी छवि बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। लंबे समय से अटके इस पुनर्विकास प्रकल्प का रास्ता आखिरकार साफ होता दिख रहा है। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) की मुंबई इमारत दुरुस्ती एवं पुनर्रचना मंडल द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आखिर दो बड़ी कंपनियों – जे. कुमार इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड और AATK कंस्ट्रक्शन – ने निविदा दाखिल कर दी है। यह वह प्रक्रिया है जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था। म्हाडा जल्द ही आर्थिक निविदा खोलेगी, जिसके बाद यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक प्रकल्प को किस कंपनी के सुपुर्द किया जाएगा। इस निविदा प्रक्रिया के आगे बढ़ने से दक्षिण मुंबई के सबसे पुराने और जर्जर इलाकों में से एक कामाठीपूरा के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है।
कामाठीपूरा लगभग 34 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें कुल 475 उपकरप्राप्त (सेस्ड) इमारतें मौजूद हैं। इसके अलावा यहां 163 गैर-उपकरप्राप्त इमारतें, 15 पुनर्बांधित इमारतें और पीएमजीपी योजना की इमारतें भी हैं। बीते दशकों में 52 इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी थीं कि वे गिर गईं या रहने योग्य नहीं रहीं। इस क्षेत्र में कुल 6,073 निवासी और 1,342 अनिवासी रहिवासी रहते हैं, जिनमें अधिकांश परिवार पीढ़ियों से यहां बसे हुए हैं। क्षेत्र में 15 धार्मिक स्थल, दो विद्यालय, चार सरकारी कार्यालय और आठ अन्य सार्वजनिक उपयोग की इमारतें भी हैं। अधिकांश इमारतें 1990 के बाद से धीरे-धीरे खस्ताहाल होती चली गईं और अब मरम्मत के परे पहुंच गई हैं। इस कारण कामाठीपूरा का पुनर्विकास अनिवार्य हो गया था।
राज्य सरकार ने इस प्रकल्प की जिम्मेदारी म्हाडा के दुरुस्ती मंडल को सौंपी थी। मंडल ने क्षेत्र की इमारतों और रहिवाशों की विस्तृत सूची तैयार कर सरकार से मंजूरी प्राप्त की। “कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट एजेंसी” के प्रावधानों के तहत इस पुनर्विकास के लिए निजी डेवलपर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, निविदा प्रक्रिया बार-बार स्थगित होती रही और समय-सीमा में कई बार विस्तार किया गया, जिससे काम में लगातार देरी होती रही। लेकिन अब जब दो कंपनियों ने औपचारिक रूप से निविदा दाखिल कर दी है, तो परियोजना को गति मिलने की संभावना बढ़ गई है।
म्हाडा के अधिकारियों के अनुसार, पुनर्विकास के लिए पहले चरण में क्षेत्र का बायोमेट्रिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। यह सर्वेक्षण ‘क्षितिज क्रिएशन’ कंपनी द्वारा किया जा रहा है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में वास्तविक रूप से मौजूद घरों, दुकानों और रहिवाशों की सही-सही संख्या का पता लगाना है। पिछले दो दिनों से यह प्रक्रिया तेज गति से जारी है। सर्वेक्षण के दौरान प्रत्येक रहिवासी का बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गिनती में भ्रम या त्रुटि न रहे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पुनर्विकास के दौरान हर वास्तविक निवासी को उसका वैध हक मिल सके और कोई भी परिवार वंचित न रहे।
म्हाडा के अनुसार, पुनर्विकास प्रकल्प के तहत कुल 8,001 रहिवाशों और लगभग 800 जमीन मालिकों का पुनर्वसन किया जाएगा। आवासीय पुनर्वसन के अंतर्गत प्रत्येक रहिवासी को 500 वर्गफुट का नया घर उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, अनिवासी या व्यावसायिक इकाई के मालिकों को 225 वर्गफुट का गाला (दुकान या कार्यस्थल) दिया जाएगा। यह पुनर्विकास योजना क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना को नया जीवन देने का कार्य करेगी। वर्षों से जर्जर भवनों और अस्वच्छ परिस्थितियों में रह रहे हजारों परिवारों को इस परियोजना से न केवल नया घर मिलेगा, बल्कि जीवन स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित पुनर्विकसित इमारतें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। पुनर्वसित इमारतों की ऊंचाई लगभग 57 मंजिला होगी, जबकि बिक्री के लिए बनने वाली इमारतें 78 मंजिला तक जा सकती हैं। इस परियोजना से कामाठीपूरा का दृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। जहां कभी संकरी गलियां और पुरानी, तिरछी दीवारों वाली इमारतें थीं, वहां अब आधुनिक टावर, हरित क्षेत्र और आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं दिखाई देंगी। यह परिवर्तन न केवल कामाठीपूरा के रहिवाशों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण मुंबई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो कामाठीपूरा मुंबई के सबसे पुराने इलाकों में से एक है। ब्रिटिश काल में मजदूरों और कामगारों के निवास के रूप में विकसित हुए इस क्षेत्र में समय के साथ घनी आबादी, सीमित जगह और पुरानी इमारतों की समस्या बढ़ती गई। बीते दशकों में यहां की अधिकांश इमारतें 80 से 100 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं और संरचनात्मक दृष्टि से कमजोर पड़ चुकी हैं। इस कारण यहां रहना लोगों के लिए जोखिम भरा हो गया था। पिछले कुछ वर्षों में कई बार इमारतें गिरने की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिससे क्षेत्र के पुनर्निर्माण की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो गई थी।
म्हाडा के अधिकारियों ने बताया कि इस बार परियोजना को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित कंपनी को कार्य आदेश दिया जाएगा और पुनर्विकास कार्य चरणबद्ध रूप से शुरू होगा। इस दौरान रहिवाशों को अस्थायी आवास की सुविधा दी जाएगी और निर्माण पूरा होने पर उन्हें नए आवास में स्थानांतरित किया जाएगा। मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी योग्य रहिवाशों को उनके दस्तावेजों के आधार पर पुनर्वसन का अधिकार मिलेगा।
कामाठीपूरा का यह पुनर्विकास प्रकल्प केवल भवन निर्माण का कार्य नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बनने जा रहा है। वर्षों से शहर के केंद्र में स्थित यह इलाका अब आधुनिक मुंबई की नई पहचान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पुनर्विकास के बाद यहां बेहतर सड़कें, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी प्रणाली और सामाजिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कहा जा सकता है कि यह परियोजना मुंबई के शहरी नवीनीकरण का एक ऐतिहासिक अध्याय साबित होगी।
म्हाडा के अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही आर्थिक निविदा खोली जाएगी और तकनीकी मूल्यांकन पूर्ण होगा, वैसे ही कार्य आदेश जारी कर दिया जाएगा। यदि सब कुछ तय समय में हुआ, तो आने वाले कुछ महीनों में कामाठीपूरा के पुनर्विकास का कार्य धरातल पर दिखने लगेगा। रहिवाशों के चेहरों पर अब उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है कि वे जल्द ही सुरक्षित और आधुनिक घरों में रह सकेंगे। इस परियोजना के पूरा होने पर कामाठीपूरा न केवल अपनी भौतिक सूरत बदलेगा बल्कि मुंबई की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नई पहचान भी पाएगा।