Home ताजा खबरपांच माह की बेटी को दीवार पर पटकने वाले पिता को सात साल की जेल

पांच माह की बेटी को दीवार पर पटकने वाले पिता को सात साल की जेल

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सेशन कोर्ट झुंझुनू का फैसला, अदालत ने कहा— अपराध भले हत्या नहीं, पर अत्यंत क्रूरता का मामला

झुंझुनू। राजस्थान के झुंझुनू जिले में सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को एक सनसनीखेज मामले में फैसला सुनाते हुए एक पिता को अपनी ही मासूम बेटी की मौत का कारण बनने पर सात साल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी का इरादा हत्या का नहीं था, लेकिन उसकी हरकत अत्यंत लापरवाह और क्रूर थी, जिससे बच्ची की मौत हो गई। अदालत ने इसे हत्या नहीं, बल्कि मानव वध (Culpable Homicide not amounting to Murder) का मामला करार दिया।

सरकारी वकील रामावतार ढाका ने बताया कि आरोपी पिता कैलाश चंद, निवासी गिरधरपुरा, थाना उदयपुरवाटी, झुंझुनू को सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे अपराध के प्रति सहानुभूति का दृष्टिकोण अपनाना न तो विधिसंगत है और न ही समाज के हित में। यदि ऐसे मामलों में हल्की सजा दी जाए तो लोगों का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।

यह दर्दनाक घटना 26 मार्च 2023 की है। कैलाश की पत्नी कविता उस समय अपने मामा विजयपाल के घर, गांव कैरू (थाना नवलगढ़) में गणगौर का त्योहार मनाने गई हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसी दिन सुबह करीब साढ़े 10 बजे कैलाश चंद अपने भाई जीवन और दोस्त नवीन के साथ मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचा।

घर पहुंचते ही कैलाश ने पत्नी कविता से झगड़ा शुरू कर दिया। सरकारी वकील के अनुसार, इस दौरान कविता की गोद में उसकी 15 माह की बेटी ओजस्वी थी। गुस्से में कैलाश ने पत्नी से बच्ची को जोर से छीना और दीवार पर पटक दिया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी। बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई और कैलाश चंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

सेशन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पत्नी कविता ने बताया कि उसकी शादी 22 नवंबर 2020 को कैलाश से हुई थी और 17 दिसंबर 2021 को बेटी ओजस्वी का जन्म हुआ था। उसने अदालत को बताया कि 26 मार्च की सुबह जब उसका पति कैरू पहुंचा, तो उसने आते ही गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। “जब मैंने बेटी को बचाने की कोशिश की, तो उसने दोनों पैर पकड़कर दीवार पर दे मारा। ओजस्वी की मौके पर ही मौत हो गई और मैं बेहोश हो गई,” — कविता ने अदालत को बताया।

कैलाश चंद ने अदालत में कहा कि यह घटना दुर्घटना थी, हत्या नहीं। उसने दावा किया कि वह पत्नी को घर ले जाने आया था। झगड़े के दौरान छीना-झपटी में बच्ची उसकी गोद से फिसलकर फर्श पर गिर गई, जिससे सिर में चोट लगी और उसकी मौत हो गई। कैलाश ने यह भी कहा कि उसने ही बच्ची को अस्पताल पहुंचाया था।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि कैलाश का अपनी बेटी को जानबूझकर मारने का इरादा नहीं था, पर उसकी हरकत अत्यधिक लापरवाह, क्रूर और अमानवीय थी। न्यायाधीश ने कहा कि “यदि ऐसे अपराधों पर नरमी दिखाई जाए तो समाज में न्याय की भावना कमजोर पड़ेगी।”

न्यायालय ने कैलाश चंद को मानव वध का दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा और दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। अदालत के इस फैसले से यह संदेश दिया गया है कि पारिवारिक विवादों में हिंसा का कोई औचित्य नहीं, और मासूम की जान लेने वाली लापरवाही भी कानून के तहत कठोर दंड की पात्र है।

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