नई दिल्ली। टीम इंडिया के नए हेड कोच गौतम गंभीर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारतीय टीम की घोषणा के बाद नया बवाल खड़ा हो गया है। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा से वनडे की कप्तानी छीने जाने और शुभमन गिल को नया कप्तान बनाए जाने के फैसले ने कई पूर्व क्रिकेटरों को नाराज कर दिया है। इसी बीच पूर्व बल्लेबाज मनोज तिवारी ने कोच गौतम गंभीर पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि, “जब से गंभीर कोच बने हैं, तभी से भारतीय टीम में उथल-पुथल शुरू हो गई है।”
मनोज तिवारी ने एक बयान में कहा कि कोच बनने के बाद से लगातार विवाद सामने आ रहे हैं — “पहले रविचंद्रन अश्विन ने संन्यास लिया, फिर विराट कोहली और रोहित शर्मा ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से विदाई ले ली। अब रोहित से वनडे कप्तानी भी छीन ली गई। इन सभी घटनाओं में हेड कोच की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” तिवारी का मानना है कि गंभीर के कोच बनने के बाद टीम मैनेजमेंट सीनियर खिलाड़ियों को धीरे-धीरे किनारे कर रहा है।
तिवारी ने कहा, “रोहित, विराट और अश्विन जैसे खिलाड़ी कोच से कहीं अधिक अनुभवी हैं। अगर टीम मीटिंग में वे कोई बात रखते हैं, तो यह उनके अनुभव की वजह से है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो इन्हें इग्नोर करना चाहते हैं। यह सब भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके पास कोई बड़ा पीआर सिस्टम नहीं है जो उनके विचारों को आगे बढ़ाए, “लेकिन मुझे पता है कि अब मेरे इस बयान के बाद कई लोग मेरे खिलाफ बातें करने लगेंगे।”
गंभीर के कोच बनने के बाद बढ़ते विवाद
गौतम गंभीर ने कोच पद संभालने के बाद टीम इंडिया की कमान संभाली थी, लेकिन उनके कार्यकाल की शुरुआत ही सवालों के घेरे में रही। न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज हार, फिर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में पराजय और अश्विन के संन्यास ने माहौल गर्म कर दिया। चैंपियंस ट्रॉफी में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने खिताब जरूर जीता, लेकिन इसके तुरंत बाद रोहित को टेस्ट और अब वनडे कप्तानी से हटाया गया।
वहीं, टीम से रविंद्र जडेजा को बाहर किया गया और युवा खिलाड़ियों को लगातार मौका दिया जा रहा है। गंभीर पर “केकेआर लॉबी” चलाने के आरोप भी लग रहे हैं, क्योंकि कोलकाता नाइट राइडर्स से जुड़े मोर्ने मॉर्कल और रियान टेन डस्काटे को भी सपोर्ट स्टाफ में शामिल किया गया है। इसके अलावा हर्षित राणा और शुभमन गिल को लगातार प्राथमिकता देने पर भी सवाल उठे हैं।
इन सभी घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या टीम इंडिया में अब सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका कम की जा रही है या कोचिंग रणनीति को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। फिलहाल बीसीसीआई ने इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन क्रिकेट जगत में इस मुद्दे पर चर्चाएं जोरों पर हैं।
