पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की हलचल तेज हो गई है। एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही सियासी उथल-पुथल में हैं। पार्टियों के भीतर नाराज नेताओं और उम्मीदवारों की बगावत की आग ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। भाजपा के लिए यह चरण सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। गोपालगंज सदर सीट से वर्तमान विधायक कुसुम देवी का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह जिला परिषद अध्यक्ष सुभाष सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। टिकट कटने की खबर से कुसुम देवी और उनके बेटे अनिकेत सिंह भावुक हो गए और आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में फूट-फूटकर रो पड़े।
दानापुर सीट पर बीजेपी ने रामकृपाल यादव को मैदान में उतारा है, जो मौजूदा विधायक रीतलाल यादव को टक्कर देंगे। विपक्षी महागठबंधन में भी मतभेद स्पष्ट दिख रहे हैं। नामांकन के अंतिम दिन तक गठबंधन के भीतर अनिर्णय और विवाद जारी रहा, जिसे पार्टी नेताओं ने ‘लठ-बंधन’ के नाम से पेश किया। कांग्रेस प्रभारी अल्लावरु ने भी बिना आधिकारिक सूची के नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया।
लोजपा-रामविलास दल ने अपने 29 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। चिराग पासवान की पार्टी ने विशेष ध्यान यादव और राजपूत जाति के उम्मीदवारों पर दिया, प्रत्येक को 5-5 सीटों पर टिकट प्रदान किया।
एनडीए ने भी सभी उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। भाजपा और जदयू ने 101-101 उम्मीदवारों का ऐलान किया है, वहीं लोजपा-रामविलास ने 15, हम 6 और रालोमो ने 6 उम्मीदवारों की सूची जारी की है।
चुनावी माहौल में भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने राजद की सदस्यता ली और अपनी पत्नी चंदा यादव के साथ छपरा से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस बीच, जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने बड़ा दावा किया है कि एनडीए में सभी दल इस चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व के समर्थन में एक स्वर हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। एनडीए में बीजेपी, जदयू, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियां शामिल हैं, जो मिलकर पूरे राज्य में चुनावी समर में उतर रही हैं।
बिहार के पहले चरण के नामांकन और टिकट वितरण ने राज्य की सियासी हवा को और गरमा दिया है। पार्टियों के भीतर नाराजगी और उम्मीदवारों की बगावत इस चुनाव को अब और भी रोमांचक और अनिश्चित बना रही है।
