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मुंबई एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी का पर्दाफाश, दो कर्मचारी गिरफ्तार

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1.6 करोड़ का सोना जब्त, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े थे आरोपी

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा की गई एक विशेष कार्रवाई में सोने की तस्करी के एक संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। शनिवार को की गई इस कार्रवाई में दो सफाई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर अंतरराष्ट्रीय सोने के तस्करों से संबंध रखने और उनकी ओर से तस्करी में सहयोग करने का गंभीर आरोप है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये दोनों आरोपी कर्मचारी एयरपोर्ट पर कार्यरत थे और अपनी आंतरिक पहुँच का दुरुपयोग करते हुए विमानों में छिपाकर लाए गए सोने को बाहर निकालने और उसे तस्करों तक सुरक्षित पहुँचाने का कार्य कर रहे थे। यह कार्यवाही डीआरआई के “ऑपरेशन गोल्डन स्वीप” के तहत की गई, जिसका उद्देश्य हवाई अड्डों पर आंतरिक कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता को उजागर कर तस्करी के ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त करना है जो लंबे समय से देश की सुरक्षा एवं आर्थिक हितों के लिए चुनौती बने हुए हैं।

डीआरआई अधिकारियों ने बताया कि तस्करों ने इस मामले में सोने को विमान के भीतर विशेष रूप से मोम के रूप में ढालकर छिपाया था ताकि वह सुरक्षा जांच के दौरान आसानी से पकड़ में न आ सके। विमान के उतरने के बाद सफाई कर्मचारी उसे योजनाबद्ध तरीके से निकालकर बाहर ले जाते और निर्धारित संपर्क सूत्रों को सौंप देते। इस मामले में जब्त किया गया सोना लगभग 1.2 किलोग्राम है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 1.6 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि आरोपी कर्मचारी लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल थे और उनका सीधा संपर्क एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट से था। इस सिंडिकेट के सदस्य विदेशों में स्थित हैं और भारत में सोने की अवैध आपूर्ति की श्रृंखला को संचालित करते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में सोने की मांग काफी अधिक है और इसके चलते तस्करी की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। सरकारी नियमों के तहत विदेश से सोना लाने पर सीमित मात्रा में शुल्क चुकाना आवश्यक होता है, परंतु तस्करी के माध्यम से इस शुल्क से बचा जाता है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है बल्कि अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। डीआरआई की ओर से बताया गया है कि “ऑपरेशन गोल्डन स्वीप” जैसे अभियानों का उद्देश्य न केवल तस्करों को पकड़ना है बल्कि एयरपोर्ट के भीतर कार्यरत उन कर्मचारियों को भी चिन्हित करना है जो ऐसे नेटवर्कों का हिस्सा बनकर अपनी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करते हैं।

इस मामले को लेकर डीआरआई ने हवाई अड्डे के प्रबंधन से भी विस्तृत जानकारी मांगी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किन-किन कर्मचारियों को विमान के भीतर जाने की अनुमति प्राप्त है और उनकी गतिविधियों पर कैसे नजर रखी जा रही है। साथ ही, अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस रैकेट में और भी कर्मचारी शामिल हैं। इससे पहले भी देश के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर तस्करी के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें एयरपोर्ट पर कार्यरत अधिकारी, तकनीकी स्टाफ और अनुबंधित कर्मचारी तस्करों की मदद करते हुए पकड़े गए हैं।

डीआरआई ने साफ किया है कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गिरफ्तार दोनों कर्मचारियों को पूछताछ के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उनके पास से बरामद मोबाइल फोन, संचार उपकरण और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इस जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे अन्य राज्यों और हवाई अड्डों पर भी ऐसे मामलों की पड़ताल की जा सकेगी।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि हवाई अड्डों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है और अगर ऐसी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग किया जाए तो यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। डीआरआई और अन्य एजेंसियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि इस प्रकार के अपराधों को जड़ से खत्म किया जा सके। इसके लिए न केवल तकनीकी निगरानी बढ़ाई जा रही है बल्कि कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच, सुरक्षा प्रशिक्षण और समय-समय पर निगरानी तंत्र को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।

यह मामला देश में तस्करी के बढ़ते हुए खतरों की एक बानगी है और यह भी स्पष्ट करता है कि तस्कर किस प्रकार लगातार नए-नए तरीके अपनाकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, डीआरआई और अन्य एजेंसियों की तत्परता और सावधानी के कारण ऐसे प्रयासों को विफल किया जा रहा है। हवाई अड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और कर्मचारियों की सतत निगरानी रखने की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक हो गई है। वर्तमान मामले में आगे की जांच जारी है और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी एकत्र करने के लिए विदेशी एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है। एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि इस कार्रवाई के बाद तस्करी नेटवर्क पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और ऐसे संगठनों की गतिविधियों को रोका जा सकेगा जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।

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