क्या आपके पैरों में चलते समय दर्द होता है? या फिर ठंड महसूस होती है जबकि मौसम सामान्य है? यदि हां, तो यह किसी साधारण थकान का संकेत नहीं, बल्कि आपके दिल की सेहत से जुड़ा एक गंभीर खतरा हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे लक्षण शरीर में पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) की ओर इशारा कर सकते हैं — एक ऐसी स्थिति जिसमें पैरों की रक्त वाहिकाएं (आर्टरीज) ब्लॉक होने लगती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ब्लॉक्ड आर्टरी: दिल की बीमारी की चुपचाप बढ़ती वजह
ब्लॉक्ड आर्टरीज हार्ट डिजीज की सबसे बड़ी वजहों में से एक हैं। जब धमनियों में प्लाक (फैट, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और अन्य पदार्थों का जमाव) बनने लगता है, तो खून का प्रवाह प्रभावित होता है। यही आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों का कारण बनता है।
लेकिन बड़ी बात यह है कि शरीर इस खतरे के संकेत पहले ही देने लगता है — खासकर पैरों के ज़रिए।
क्या है पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD)?
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज यानी PAD एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पैरों की आर्टरीज में प्लाक जमा हो जाता है, जिससे वहां ब्लड फ्लो कम हो जाता है। यह स्थिति खासकर उन लोगों में ज्यादा पाई जाती है जो स्मोकिंग करते हैं, डायबिटीज़ से ग्रसित हैं, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं।
PAD के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और शुरू में इन्हें नजरअंदाज करना आसान होता है। यही वजह है कि लोग इसे आम थकावट या बढ़ती उम्र का असर मानकर डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं।
पैरों में ब्लॉक्ड आर्टरीज के संकेत
1. वॉकिंग पेन (चलते समय दर्द)
PAD का सबसे आम और पहला लक्षण है — चलते समय पैरों की मांसपेशियों, खासकर कैल्फ मसल्स में दर्द, क्रैम्पिंग, भारीपन या सुन्नपन महसूस होना। जैसे ही व्यक्ति रुकता है, यह दर्द कुछ ही समय में गायब हो जाता है। लेकिन फिर से चलने पर दोबारा आ जाता है। इस स्थिति को “क्लॉडिकेशन” कहा जाता है।
2. कोल्ड फीट (पैरों का ठंडा रहना)
अगर आपके एक या दोनों पैर सामान्य से ज्यादा ठंडे महसूस हो रहे हैं, खासकर उनके तलवे, तो यह ब्लड सर्कुलेशन के कम होने का संकेत हो सकता है। कई बार एक पैर दूसरे की तुलना में अधिक ठंडा लगता है — यह और भी खतरनाक संकेत हो सकता है।
3. स्किन चेंजेस (त्वचा में बदलाव)
ब्लड सप्लाई कम होने के कारण पैरों की त्वचा का रंग बदल सकता है। त्वचा पीली या नीली दिखाई दे सकती है। साथ ही स्किन पतली, चमकदार और नाजुक भी हो जाती है। बाल झड़ सकते हैं या उगना बंद हो सकते हैं। नाखून भी धीमे बढ़ते हैं और कमजोर हो जाते हैं।
4. डिलेड हीलिंग (घाव का देर से भरना)
अगर पैरों या उंगलियों पर छोटे-मोटे कट या छिलने के घाव जल्दी नहीं भरते, तो यह भी एक गंभीर संकेत है कि ब्लड सर्कुलेशन में कमी है। समय पर इलाज न होने पर ये घाव अल्सर में बदल सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
5. वीक पल्स (कमज़ोर या अनुपस्थित पल्स)
डॉक्टरी जांच में अगर पैरों की धड़कन (पल्स) कमजोर या अनुपस्थित पाई जाए, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि ब्लड फ्लो में रुकावट है। डॉक्टर आमतौर पर एंकल-ब्रैकील इंडेक्स (ABI) टेस्ट के जरिए इसकी पुष्टि करते हैं।
क्यों है इसे नजरअंदाज करना खतरनाक?
PAD को अगर समय रहते नहीं पहचाना गया, तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है। ब्लड सप्लाई पूरी तरह बाधित होने पर गैंग्रीन की स्थिति आ सकती है, जिसमें प्रभावित अंग को काटना तक पड़ सकता है। इतना ही नहीं, PAD से ग्रसित व्यक्ति में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
कब दिखाएं डॉक्टर को?
यदि ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लंबे समय से दिखाई दे रहा है, तो बिना देरी किए किसी कार्डियोलॉजिस्ट या वैस्क्युलर स्पेशलिस्ट से संपर्क करें। शुरुआती जांच और एक सिंपल डॉप्लर या ABI टेस्ट से PAD की पुष्टि की जा सकती है।
क्या है बचाव और इलाज?
PAD का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते इसे समय रहते पहचान लिया जाए। शुरुआती स्टेज में जीवनशैली में बदलाव — जैसे कि स्मोकिंग छोड़ना, नियमित एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट और वजन नियंत्रित रखना — काफी फायदेमंद होता है। इसके साथ ही डॉक्टर दवाओं के ज़रिए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं। ज्यादा गंभीर मामलों में एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
