गोरेगांव में भीड़ का कहर: चोर समझकर युवक की पीट-पीटकर हत्या

मुंबई। गोरेगांव पश्चिम में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दीपावली के बीच जब लोग खुशियां मना रहे थे, उसी दौरान एक 26 वर्षीय युवक को भीड़ ने चोर समझकर बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान हर्षल परमार के रूप में हुई है। यह घटना न केवल इंसानियत पर सवाल उठाती है, बल्कि भीड़ के न्याय (मॉब लिंचिंग) के बढ़ते खतरनाक चलन की भयावह तस्वीर भी पेश करती है।

घटना गोरेगांव पुलिस स्टेशन क्षेत्र के राज बिल्डर की एक नई इमारत में हुई, जहां निर्माण कार्य चल रहा था। इस इमारत की तीसरी मंजिल पर कई मजदूर रह रहे थे। बताया जाता है कि दो दिन पहले रात में उसी मंजिल से एक मजदूर का मोबाइल फोन चोरी हो गया था। चोरी के बाद मजदूरों को शक हुआ कि यह काम हर्षल ने किया है, और बिना किसी ठोस सबूत के उन्होंने युवक को पकड़ लिया।

बेरहमी से पिटाई, बंधक बनाकर दी यातना

सूत्रों के अनुसार, गुस्से में भरे मजदूरों ने हर्षल के हाथ-पैर बांध दिए और उसकी बुरी तरह पिटाई शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने उसे रस्सी से दीवार से बांधा और डंडों, लाठियों से उसकी बेरहमी से पिटाई की। पिटाई इतनी गंभीर थी कि हर्षल की मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान किसी ने घटना की तस्वीर भी खींच ली, जो अब पुलिस के लिए अहम सबूत साबित हो रही है।

जब इमारत के मैनेजर को घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चार आरोपी गिरफ्तार, हत्या का मामला दर्ज

घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार आरोपियों — सलमान मोहम्मद खान, इसम्मुला खान, गौतम, और राजीव गुप्ता — को गिरफ्तार कर लिया है। सभी के खिलाफ हत्या (IPC की धारा 302) और साक्ष्य छिपाने (धारा 201) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गलतफहमी या साजिश? जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या हर्षल वाकई चोरी की वारदात में शामिल था या वह सिर्फ एक गलतफहमी का शिकार बना। प्रारंभिक जांच में अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जो हर्षल को दोषी साबित करता हो। पुलिस अधिकारी मामले को संवेदनशील मानते हुए फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है।

“कोई भी कानून से ऊपर नहीं” — पुलिस का बयान

गोरेगांव पुलिस ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदेहास्पद घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें, खुद कानून हाथ में न लें।

मानवता पर सवाल उठाता मंजर

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर्षल इलाके में जाना-पहचाना युवक था, जो अक्सर मजदूरों के बीच आता-जाता था। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उसने चोरी से इनकार किया था, लेकिन गुस्से में अंधी भीड़ ने उसकी एक न सुनी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और पुलिस ने आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि भीड़तंत्र का यह बढ़ता चलन समाज के लिए कितना घातक बन चुका है। कानून की अनुपस्थिति में ‘संदेह’ ही जब ‘सजा’ बन जाता है, तो इंसाफ और मानवता दोनों हार जाते हैं।

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