घाटकोपर में दीपावली के अवसर पर इंदिरा नगर स्थित शिव छाया कृपा चाल परिसर में ‘तोरणा किला’ का शानदार निर्माण किया गया है, जो इलाके का मुख्य आकर्षण बन गया है। यह अद्वितीय उपक्रम शिवाई ग्रुप के 25 उत्साही युवाओं और बच्चों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। मात्र चार दिन और तीन रातों में मिट्टी और अन्य आवश्यक सामग्रियों से तैयार किया गया यह किला स्थानीय लोगों और बच्चों के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अनुभव साबित हो रहा है। इस पहल के लिए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश उतेकर ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया और किले के निर्माण में जरूरी सामग्री की व्यवस्था की।
शिवाई ग्रुप के लिए यह लगातार दूसरा वर्ष है जब उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्यगाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। पिछले वर्ष उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान ‘शिवनेरी किला’ की प्रतिकृति तैयार की थी, जो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रही थी। इस वर्ष उन्होंने अपने प्रेरणा स्रोत के रूप में शिवाजी महाराज द्वारा कम उम्र में जीते गए ‘तोरणा गढ़’ को चुना। अंकुश उतेकर ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम, दूरदृष्टि और गढ़किलों के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराना है।
स्थानीय निवासियों और बच्चों ने इस किले को देखकर उत्साह और गौरव की भावना व्यक्त की। मिट्टी के किले में हर विवरण को बारीकी से तैयार किया गया है, जिससे यह वास्तविक किले की तरह प्रतीत होता है। शिवाई ग्रुप ने यह भी सुनिश्चित किया है कि उनका यह प्रयास केवल दीपावली तक सीमित न रहे। समूह ने संकल्प किया है कि वे हर वर्ष एक किले की प्रतिकृति बनाकर छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए किलों की पूरी श्रृंखला प्रस्तुत करेंगे, जिसमें शिवनेरी से लेकर उनके अंतिम विजय किलों तक का इतिहास जीवंत रूप में लोगों के सामने आएगा।
यह प्रयास न केवल बच्चों के लिए शैक्षिक अनुभव प्रदान करता है बल्कि स्थानीय समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और ऐतिहासिक ज्ञान को भी बढ़ावा देता है। समूह की इस पहल से यह संदेश भी जाता है कि इतिहास को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर, उसे रचनात्मक और अनुभवात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। शिवाई ग्रुप की इस अद्वितीय पहल ने घाटकोपर क्षेत्र को दीपावली के अवसर पर एक नई पहचान दी है और आने वाले वर्षों में यह परंपरा और अधिक विस्तारित होने की संभावना है।
