Home ताजा खबरभैरवाष्टमी पर काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव सहित अष्ट भैरव का धूमधाम के साथ मनाया गया जन्मोत्सव

भैरवाष्टमी पर काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव सहित अष्ट भैरव का धूमधाम के साथ मनाया गया जन्मोत्सव

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वाराणसी।  मार्गशीर्ष (अगहन) माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार को काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव सहित अष्टभैरव का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।  इस अवसर पर कालभैरव मंदिर के गर्भगृह सहित बाहरी हिस्से को भी आकर्षक ढ़ंग से सजाया गया । काशी में अष्टभैरव विराजमान हैं। इसमें दुर्गाकुंड पर चंड भैरव, हनुमानघाट पर रुद्रभैरव, कमच्छा पर क्रोधन भैरव व उन्मत्त भैरव, नखास पर भीषण भैरव, दारानगर में असितांग भैरव, सरैयां में लाट भैरव, गायघाट पर संहार भैरव विराजमान हैं। बाबा कालभैरव के साथ शहर के न्यायाधीश लाटभैरव, बटुकभैरव, रुरु भैरव, आसभैरव, दंडपाणि भैरव, यक्ष भैरव, उन्मत्त भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव और कोडमदेश्वर भैरव मंदिरों में विविध अनुष्ठानों का आयोजन सुबह से ही शुरू हो गया। भगवान शिव के अवतार कालभैरव के प्राकट्योत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल रहा। काशी के कोतवाल के दरबार में उनके विग्रह को पंचामृत स्नान कराने के बाद सिंदूर लेपन कर उन्हें रजत मुखौटा, रुद्राक्ष की माला और नरमुंडों की रजत माला धारण कराई गई। दरबार में शाम को पांच वैदिक ब्राह्मण वसंत पूजा मंत्रोंच्चार के बीच हुआ इसके बाद बाबा काे मदिरा का भोग लगाया गया। मंदिर के महंत एवं संरक्षक कैलाश नाथ दुबे, सुरेंद्र दुबे, महेंद्र नाथ दुबे की देखरेख में  सवा किलो कपूर से बाबा की विराट आरती संपन्न की गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर और चौराहे पर श्रद्धालु केक काटकर बाबा का जन्मोत्सव मनाए। मंदिर के भीतर 151 किलो के फलाहारी केक का भोग लगाया गया, जबकि चौराहे पर भक्तों ने 1100 किलो का विशाल फलाहारी केक काटा।

बाबा कालभैरव के बाद बाबा बटुक भैरव नाथ जी का काशी में विशेष महत्व है। भैरवाष्टमी के अवसर पर इस मंदिर में भी बुधवार को पूरे दिन विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। साथ ही 56 व्यंजनों का भोग बाबा के समक्ष अर्पित किया गया। इस दौरान बाबा के दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ी। भैरवाष्टमी  के अवसर पर बाबा बटुक भैरवनाथ के मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

गौरतलब हो कि हर वर्ष मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान काल भैरव का जन्म हुआ था। काशी में रहने वाले हर व्यक्ति को यहां पर रहने के लिए बाबा काल भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने ही इनकी नियुक्ति यहां की थी।

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