‘टाइप 1’ मधुमेह वाले एक हजार जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई रोशनी, हिंदुजा फाउंडेशन की अनोखी पहल ने बदली हजारों परिवारों की तस्वीर

मुंबई: सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में काम कर रहे हिंदुजा समूह के हिंदुजा फाउंडेशन ने ‘टाइप 1 डायबिटीज़ इनिशिएटिव’ के माध्यम से मुंबई, पुणे और चेन्नई के 1000 से अधिक जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। फाउंडेशन का यह मॉडल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक अनूठा सामाजिक हस्तक्षेप माना जा रहा है, जिसमें बच्चों को संपूर्ण चिकित्सा देखभाल, पोषण सहायता और भावनात्मक सहयोग पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर इस महत्त्वपूर्ण पहल के परिणामों की जानकारी साझा की गई।

हिंदुजा फाउंडेशन ने अप्रैल 2019 में यह कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना था। मात्र छह वर्षों में इस पहल ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कार्यक्रम से जुड़े बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं काफी कम हुई हैं। वहीं, इन बच्चों का औसत HbA1c स्तर 10.4 प्रतिशत से घटकर 7.8 प्रतिशत रह गया है, जो मधुमेह प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।

स्वास्थ्य सुधारों के साथ ही इस पहल का सकारात्मक प्रभाव बच्चों के सम्पूर्ण विकास में भी दिखाई दे रहा है। कई बच्चों ने तीरंदाजी, शतरंज और अन्य राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फाउंडेशन का कहना है कि इससे न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है। भारत में टाइप 1 मधुमेह से प्रभावित बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है और हर वर्ष इन मामलों में लगभग 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में सभी के लिए समान, सुलभ और दीर्घकालिक मधुमेह देखभाल की जरूरत और भी बढ़ जाती है।

हिंदुजा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमण कल्याणकृष्णन के अनुसार, “टाइप 1 मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और उम्मीद का सफर है। इस पहल के जरिये हम इन बच्चों और उनके परिवारों को संवेदनशील और समुदाय-आधारित देखभाल प्रदान कर रहे हैं, ताकि वे चिकित्सा सहायता के साथ-साथ जीवन में आगे बढ़ने की ताकत भी प्राप्त कर सकें।”

‘टाइप 1 डायबिटीज़ इंडिया’ पहल को पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, मद्रास डायबिटीज़ रिसर्च फाउंडेशन, डॉ. मोहन’स डायबिटीज़ स्पेशियलिटीज़ सेंटर और पुणे के केईएम हॉस्पिटल के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत कम आय वाले परिवारों के बच्चों को मुफ्त इंसुलिन, जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाएं, नियमित काउंसलिंग, समूह-आधारित शिक्षा मंच और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों और परिवारों में जागरूकता बढ़ाना, उन्हें बीमारी से लड़ने की क्षमता देना और संवेदनशील वातावरण में बेहतर उपचार सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम के तहत 40 से अधिक बच्चों को इंसुलिन पंप उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 20 अत्याधुनिक स्वचालित इंसुलिन वितरण प्रणालियां शामिल हैं, जो बच्चों को अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित जीवन जीने में मदद करती हैं। पुणे में फाउंडेशन और केईएम अस्पताल द्वारा शुरू किया गया ‘क्लबवन’ प्लेटफॉर्म एक प्रभावी पीयर-सपोर्ट मॉडल साबित हुआ है, जो बच्चों में आत्मविश्वास, दृढ़ता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

पहल के चलते बच्चों में अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में लगातार गिरावट आई है, जबकि स्कूल उपस्थिति, खेलकूद तथा अन्य गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। पोषण स्तर और शारीरिक विकास में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। फाउंडेशन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर डायबिटीज़ एंड एंडोक्रिनोलॉजी के साथ मिलकर वैश्विक मधुमेह अनुसंधान में भी योगदान दिया है। इसके परिणाम 2025 में बैंकॉक और वियना में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किए गए।

हिंदुजा फाउंडेशन का लक्ष्य भविष्य में इस मॉडल को देशभर में विस्तार देना है। इसका उद्देश्य मधुमेह प्रबंधन को और अधिक किफायती, सुलभ और डिजिटल माध्यमों से सक्षम बनाना है, ताकि देश के हर बच्चे को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर मधुमेह देखभाल प्राप्त हो सके।

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