बदलापुर। बदलापुर रेलवे लाइन के ऊपर पूर्व-पश्चिम दिशा को जोड़ने वाला बदलापुर का स्वतंत्रवीर विनायक दामोदर सावरकर उड़ान पुल आज खुद अपनी मजबूती पर सवाल खड़ा कर रहा है। वर्ष 2004 में मात्र 5 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल बीते 20 वर्षों में डामरीकरण (डाबर) के नाम पर करीब 600 करोड़ रुपये तक का खर्च निगल चुका है, इसके बावजूद इसकी स्थिति अब धोखादायक बताई जा रही है।
समाजसेवक ज्ञानेश्वर (नाना) देशमुख ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि यह पुल मूल रूप से पूर्व से पश्चिम आने-जाने वाले वाहनों की सुविधा के लिए बनाया गया था और इसका नाम विनायक दामोदर सावरकर के नाम पर रखा गया। पुल पर हर साल दो से तीन बार डाबर का काम किया जाता है और औसतन हर वर्ष करीब 10 इंच मोटी परत चढ़ाई जाती रही है।
वर्ष 2022 में वीजेटीआई (VJTI) की स्ट्रक्चरल जांच टीम ने पुल की स्थिति का परीक्षण किया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में कहा गया कि पुल के बीच विस्तार (एक्सपैंशन) के लिए छोड़े गए अंतर को नगर पालिका के तत्कालीन शहर अभियंता और ठेकेदार की लापरवाही के कारण पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजतन पुल पर लगातार डाबर चढ़ते जाने से उसका वजन आवश्यकता से कहीं अधिक बढ़ गया, जिससे उसकी संरचनात्मक क्षमता कमजोर पड़ती जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि पुराने डाबर को पूरी तरह हटाए बिना नया डाबर डालना पुल की उम्र के लिए घातक है। लेकिन देशमुख का आरोप है कि डाबर हटाने पर आने वाला खर्च ठेकेदार द्वारा हड़प लिया गया और बिना तकनीकी प्रक्रिया अपनाए बार-बार डाबर डाल दिया गया।
देशमुख ने इस पूरे मामले में बदलापुर के राजनीतिक प्रतिनिधियों को भी दोषी ठहराया है। उनका सवाल है कि जब टेंडर और कमीशन की भाषा सभी समझते हैं, तब जनता के टैक्स से बने इस पुल की बदहाली पर अज्ञानता क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने मांग की है कि नगर पालिका के सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यकारी अभियंता और शहर अभियंता VJTI की रिपोर्ट में उठाए गए अहम मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई करें, अन्यथा किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।