समंदर पर हिंदुस्थान की दहाड़!, नौसेना का ऑपरेशनल शोकेस

थिरुवनंतपुरम में नौसेना का जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन

आईएनएस विक्रांत और 20 से ज्यादा युद्धपोतों ने बढ़ाया देश का समुद्री रुतबा

नौसेना दिवस 2025 पर हिंदुस्थानी नौसेना ने थिरुवनंतपुरम में अपने अब तक के सबसे प्रभावशाली ऑपरेशनल शोकेस के दौरान सचमुच यह साबित कर दिया कि आज समंदर पर हिंदुस्थान की दहाड़ पहले से कहीं अधिक बुलंद और निर्णायक है। इस जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन में देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के नेतृत्व में 20 से ज्यादा अत्याधुनिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों ने जो समन्वित सामरिक क्षमता, तकनीकी श्रेष्ठता और समुद्री प्रभुत्व का दृश्य रचा, उसने न केवल थिरुवनंतपुरम के तट को रोमांचित किया बल्कि देश के समुद्री रुतबे को नई ऊंचाइयों पर स्थापित कर दिया।

हिंदुस्थानी नौसेना ने थिरुवनंतपुरम के शंगुमुघम बीच पर एक ‘संचालनात्मक प्रदर्शन’ के माध्यम से अपनी सामरिक दक्षता और समुद्री ताकत का प्रभावशाली परिचय दिया। भव्य ऑपरेशनल शोकेस ने नौसेना की प्रबल युद्धक क्षमता, तकनीकी उत्कृष्टता और हर परिस्थिति में तैयार रहने की ऑपरेशनल तत्परता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं राष्ट्रपति व सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू का स्वागत नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने किया। उनके आगमन पर 150 सैनिकों की औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर ने राष्ट्रपति को सलामी दी। ‘ऑप डेमो’ के दौरान अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्मों ने समन्वित करतबों के जरिए समुद्री क्षेत्र में शक्ति, गति और सटीकता के साथ संचालन करने की हिंदुस्थानी नौसेना की क्षमता का रोमांचक प्रदर्शन किया। देश के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत सहित 20 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों, उन्नत  लड़ाकू हवाई जेटा और मोरक्को कमांडोज की प्रभावशाली भागीदारी ने नौसेना की बढ़ती ताकत और तैयारियों को नए आयाम दिए।

मौजूद दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

सी कैडेट कॉर्प्स द्वारा हॉर्नपाइप नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और नौसैनिक जवानों की तेज गति वाली ‘कॉन्टिन्यूटी ड्रिल’ ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना बैंड की ‘बीटिंग रिट्रीट’ और सूर्यास्त के समय नौसैनिक जहाजों की आकर्षक प्रकाश-सज्जा के साथ हुआ।

इसलिए मनाया जाता है नौसेना दिवस

नौसेना दिवस 1971 के युद्ध में ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के दौरान भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक विजय को स्मरण कर मनाया जाता है। बीते दशकों में भारतीय नौसेना ने निरंतर अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ किया है और अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ खरीदार नौसेना से निर्माता नौसेना के रूप में पूर्णत: परिवर्तित हो चुकी है।

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