आग की लपटों में घिरे यात्री, जान बचाने को मची भगदड़
मुख्यमंत्री ने जताया शोक, मृतकों को 2-2 लाख, घायलों को 50-50 हजार की सहायता
मथुरा। घने कोहरे ने एक बार फिर यमुना एक्सप्रेस-वे को मौत का रास्ता बना दिया। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे मथुरा जिले के बलदेव थाना क्षेत्र अंतर्गत माइल स्टोन 127 के पास एक के बाद एक दर्जनभर वाहन आपस में टकरा गए। भीषण टक्कर के बाद कई वाहनों में आग लग गई, जिससे एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी मच गई। जलते वाहनों से उठती आग की लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के साथ बसें, कारें और अन्य वाहन एक-दूसरे में घुस गए। देखते ही देखते आग भड़क उठी। वाहनों में सवार यात्री चीखते-चिल्लाते हुए जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कई लोग जलते वाहनों में फंस गए, जिन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।
जिला प्रशासन ने इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है। हालांकि प्रशासनिक और पोस्टमार्टम गृह के सूत्रों का कहना है कि मृतकों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह के अनुसार, कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं, जिनकी पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। अब तक केवल तीन मृतकों की पहचान हो सकी है।
सूचना मिलते ही जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार मौके पर पहुंच गए। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण, पुलिस, अग्निशमन विभाग और एंबुलेंस सेवाओं की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभाला। आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। गैस कटर से बसों और कारों को काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।
प्रशासन के अनुसार, दुर्घटना में तीन रोडवेज बसें, चार प्राइवेट स्लीपर बसें और पीछे से आ रही तीन कारें आपस में टकरा गईं। हादसे में डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें दो दर्जन से अधिक एंबुलेंसों के माध्यम से जिला अस्पताल मथुरा, जिला संयुक्त अस्पताल वृंदावन, राया और बलदेव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया।
जिलाधिकारी ने बताया कि चार लोगों की मौके पर ही जिंदा जलने से मौत हो गई थी, जबकि उपचार के दौरान अन्य लोगों की मौत की सूचना भी सामने आई है। पोस्टमार्टम गृह के सूत्रों के मुताबिक, दोपहर तक 18 शव बैग वहां पहुंच चुके थे। वहीं प्रशासनिक सूत्र मृतकों की संख्या 23 तक बता रहे हैं।
हादसे में जिन तीन लोगों की पहचान हुई है, उनमें अखिलेश प्रताप सिंह पुत्र वंशीधर, निवासी नेहती प्रयागराज शामिल हैं। परिजनों के अनुसार वे प्रदेश सरकार के एक मंत्री की पारिवारिक रस्म में शामिल होकर दिल्ली जा रहे थे। दूसरी पहचान रामपाल पुत्र पुरोहित राम, निवासी आजमगढ़ के रूप में हुई है, जिनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। तीसरे मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भीषण हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के आदेश पर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के समय अधिकांश यात्री नींद में थे। अचानक जोरदार टक्कर और आग लगने से लोग संभल भी नहीं पाए। स्लीपर बसों में फंसे कई यात्रियों को खिड़कियों और दरवाजों से धक्का देकर बाहर निकाला गया।
यमुना एक्सप्रेस-वे पर यह हादसा एक बार फिर कोहरे के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने कोहरे को हादसे की मुख्य वजह बताया है, वहीं जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
