नाशिक सत्र न्यायालय ने मंगलवार, 16 दिसंबर को सदनिका घोटाला मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। बुधवार, 17 दिसंबर को अजित पवार गुट के मंत्री माणिकराव कोकाटे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस्तीफे संबंधी पत्र राज्यपाल आचार्य देवव्रत को भेजा, जिसे तुरंत मंजूरी मिल गई। माणिकराव कोकाटे ने इस्तीफा उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को सौंपा। इसके बाद उनके पास रहे सभी विभागों की जिम्मेदारी भी अजित पवार को सौंपी गई। यह कदम राज्य की राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ी खबर के रूप में सामने आया है।
सदनिका घोटाला मामले में जिला अदालत द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद माणिकराव कोकाटे को 17 दिसंबर की सुबह मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज जारी है। कोकाटे राज्य के खेल मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके इस्तीफे से खेल विभाग समेत अन्य विभागों का कार्यभार अब उपमुख्यमंत्री अजित पवार देखेंगे।
नासिक सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के 20 फरवरी के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि कोकाटे ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैट आवंटित कराने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा किए और राज्य सरकार को धोखा दिया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कोकाटे एक समृद्ध किसान हैं।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से राज्य की राजनीति में नया मोड़ आएगा। विपक्ष ने कोकाटे के इस्तीफे की मांग को लेकर तेज़ी दिखाई थी। कोकाटे ने सत्र न्यायालय के फैसले को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसकी सुनवाई शुक्रवार को होनी है। लेकिन उससे पहले ही उनके इस्तीफे की खबर सामने आ गई।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से, माणिकराव कोकाटे का इस्तीफा और विभागीय जिम्मेदारी का उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सौंपा जाना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा, बल्कि राज्य सरकार के कार्य संचालन में भी निरंतरता बनी रहेगी। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं तेज हो गई हैं और आगामी सियासी समीकरणों को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं।
