टेलीविजन जगत में परिणीता, दुर्गा और चारु, इमली, कुंडली भाग्य और अनुपमा जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों से अपनी सशक्त पहचान बनाने वाली अभिनेत्री अद्रिजा रॉय मानती हैं कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में असली उपलब्धि शोहरत या लोकप्रियता नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाना है। उनके अनुसार सच्चा अभिनेता वही होता है, जिसका किरदार स्क्रीन बंद होने के बाद भी दर्शकों की यादों में ज़िंदा रहता है।
अद्रिजा कहती हैं, “स्टोरीटेलिंग सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने तक सीमित नहीं होती। असली बात यह है कि आपकी कहानी दर्शकों के साथ कितने समय तक बनी रहती है।” उनके लिए अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं, बल्कि भावनाओं के ज़रिये लोगों से जुड़ने की कला है। जब कोई किरदार दर्शकों के दिल को छू लेता है, तो कलाकार की सारी मेहनत सार्थक हो जाती है।
वे मानती हैं कि अभिनय एक रचनात्मक आज़ादी का माध्यम है, लेकिन यह पेशा जितना ग्लैमरस दिखता है, उतना ही अंदर से चुनौतीपूर्ण भी है। अद्रिजा के अनुसार हर नए प्रोजेक्ट के साथ उम्मीदें और जजमेंट जुड़ जाते हैं। “तारीफ और आलोचना—दोनों को स्वीकार करना ही एक कलाकार को आगे बढ़ने में मदद करता है,” वे स्पष्ट करती हैं। उनके लिए आत्मविश्वास और धैर्य इस लंबे सफर के सबसे मज़बूत आधार हैं।
अपने निजी जीवन में अद्रिजा मानसिक और शारीरिक संतुलन को बेहद अहम मानती हैं। वे कहती हैं, “वर्कआउट और ऐक्टिव रहना सिर्फ फिटनेस का ज़रिया नहीं, बल्कि खुद से जुड़ने का तरीका है।” उनके अनुसार संतुलित जीवन ही रचनात्मकता को बनाए रखता है। अद्रिजा रॉय के लिए अभिनय सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि निरंतर आत्म-खोज की प्रक्रिया है। वे मुस्कराते हुए कहती हैं, “सच्चाई, ईमानदारी और जुनून—यही वो मूल तत्व हैं जो दर्शकों के साथ असली और गहरा जुड़ाव बनाते हैं।”
