
बारामती । उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। परिवार और परिचितों के अनुसार यह अजित पवार के साथ उनकी चौथी उड़ान थी। हादसे की खबर मिलते ही उनके घर में मातम पसर गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जाता है कि पिंकी माली को मॉडलिंग का खास शौक था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके सामने मॉडलिंग और एविएशन—दोनों क्षेत्रों में करियर बनाने का विकल्प था। हालांकि पिता शिवकुमार माली के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन पर उन्होंने फ्लाइट अटेंडेंट बनने का रास्ता चुना। परिवार का कहना है कि जब पिंकी ने पहली बार आसमान में उड़ान भरी, तो पूरे घर को उस पर गर्व महसूस हुआ। वह अपने काम को लेकर बेहद समर्पित और अनुशासित थीं।
पिंकी का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का रहने वाला है। उनके पिता शिवकुमार माली ने बताया कि वर्ष 1989 में वह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्राई क्लीनिंग का काम करते थे। एक छोटी सी चूक के कारण उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी, जिसके बाद उन्होंने ड्राइविंग का व्यवसाय शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी को बेहतर भविष्य देने का सपना देखा और उसकी पढ़ाई व करियर के लिए हर संभव प्रयास किया।
हादसे से एक रात पहले पिंकी ने परिवार से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था कि वह अजित पवार के साथ बारामती जा रही हैं और वहां से नांदेड़ के लिए रवाना होंगी। परिवार को अंदेशा नहीं था कि यह बातचीत उनकी आखिरी होगी। जैसे ही दुर्घटना की सूचना मिली और यह स्पष्ट हुआ कि विमान में अजित पवार सवार थे, परिजनों को अनहोनी की आशंका हो गई। इसके बाद जब पिंकी के निधन की पुष्टि हुई, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
फिलहाल प्रशासन और जांच एजेंसियां हादसे की पड़ताल में जुटी हैं। वहीं, पिंकी माली की असमय मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सपनों की उड़ान भरने वाली कई जिंदगियां किस तरह एक पल में खत्म हो जाती हैं।