
नई दिल्ली/मुंबई। देश में समय-समय पर हुए विमान और हेलीकॉप्टर हादसों ने कई बार राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत ने एक बार फिर उन त्रासद घटनाओं की याद ताजा कर दी, जिनमें देश ने अपने कई बड़े नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को खो दिया। इन हादसों ने न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ाई, बल्कि हवाई सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
जनवरी 2026: अजित पवार
महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कुल पांच लोगों की जान गई। वे पंचायत चुनाव प्रचार के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे।
जून 2025: विजय रूपाणी
अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 241 यात्रियों की मौत हुई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।
मार्च 2022: जी. एस. बालयोगी
लोकसभा अध्यक्ष और टीडीपी के वरिष्ठ नेता जी. एस. बालयोगी की आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई।
दिसंबर 2021: जनरल बिपिन रावत
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का तमिलनाडु में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन हुआ। इस हादसे में उनकी पत्नी सहित अन्य सैन्य अधिकारी भी मारे गए।
अप्रैल 2011: दोरजी खांडू
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की चीन सीमा के पास पवन हंस हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई।
सितंबर 2009: वाई. एस. राजशेखर रेड्डी
आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएसआर की नल्लामाला पहाड़ियों में हेलीकॉप्टर हादसे में जान चली गई।
मार्च 2005: ओपी जिंदल
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री और उद्योगपति ओपी जिंदल की सहारनपुर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई।
सितंबर 2004: साइप्रियन संगमा
मेघालय के ग्रामीण विकास मंत्री साइप्रियन संगमा समेत 10 लोगों की शिलांग के पास हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हुई।
सितंबर 2001: माधवराव सिंधिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया का उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में चार्टर्ड विमान दुर्घटना में निधन हुआ।
जून 1980: संजय गांधी
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी की दिल्ली में विमान दुर्घटना में मौत हो गई।
इन घटनाओं ने बार-बार यह साबित किया है कि तकनीकी प्रगति के बावजूद हवाई यात्रा में सुरक्षा को लेकर सतर्कता और सख्त निगरानी की लगातार जरूरत बनी हुई है।