मासूम बेटे ने थामा मां का शव, दादा ने खींचा ठेला
फरीदाबाद | हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली को उजागर करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना फरीदाबाद से सामने आई है। यहां शव वाहन उपलब्ध न होने के कारण एक परिवार को महिला का शव सब्जी ढोने वाले ठेले पर रखकर घर तक ले जाना पड़ा। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाला है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय अनुराधा की टीबी से इलाज के दौरान बीके अस्पताल में मौत हो गई। महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शव वाहन या एंबुलेंस की मांग की, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई। मजबूरी में परिवार ने ठेले का सहारा लिया। इस दौरान मासूम बेटा अपनी मां के शव के पास बैठा रहा और झटकों से शव गिर न जाए, इसके लिए उसे थामे रहा, जबकि दादा ठेले का हैंडल पकड़कर पैदल चलते नजर आए।
बताया जा रहा है कि बीके अस्पताल से मृतका का घर करीब 10 किलोमीटर दूर सारण इलाके में स्थित है। रास्ते में एक स्थानीय व्यक्ति ट्रैफिक हटाकर परिवार की मदद करता दिखा। मृतका के पति गुनगुन ने बताया कि पत्नी के इलाज में उनकी सारी जमा पूंजी खर्च हो चुकी थी। निजी एंबुलेंस का किराया देने की स्थिति में वे नहीं थे। उन्होंने कहा कि वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और बीते तीन महीनों से पत्नी का इलाज बीके अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में कराया जा रहा था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया, सरकार पर उठे सवाल
इस घटना को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इसे अमानवीय करार देते हुए कहा कि यह मामला हरियाणा की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की संवेदनहीनता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान एक गरीब मजदूर की पत्नी की मौत हो गई, लेकिन एंबुलेंस की सुविधा न मिलने के कारण परिवार को शव ठेले पर ढोना पड़ा।
ढांडा ने कहा कि सबसे पीड़ादायक तस्वीर वह थी, जिसमें 12 वर्षीय बेटा अपनी मां के शव को कपड़े से ढकता नजर आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परिवार को मौत के बाद भी सम्मानजनक विदाई तक नसीब नहीं हुई।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।