
धारदार हथियारों से किया गया हमला, आठ आरोपियों पर मामला दर्ज
नवी मुंबई। उलवे इलाके में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल पर संदिग्ध ड्रग तस्करों ने उस समय जानलेवा हमला कर दिया, जब टीम एक मादक पदार्थ तस्करी मामले में आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही थी। शगुन चौक के पास हुई इस वारदात में चार पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनका इलाज फिलहाल जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुंबई पुलिस की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि उलवे क्षेत्र में ड्रग तस्करी से जुड़े कुछ आरोपी सक्रिय हैं। इसी सूचना के आधार पर एंटी-नारकोटिक्स टीम ने कार्रवाई शुरू की। जैसे ही पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने की कोशिश की, वे अचानक उग्र हो गए और टीम पर हमला बोल दिया। आरोपियों ने चॉपर, तलवार, हॉकी स्टिक और गांवों में इस्तेमाल होने वाली भारी कुल्हाड़ी जैसे खतरनाक हथियारों से पुलिसकर्मियों पर वार किए।
इस हमले में आरसीएफ पुलिस स्टेशन में तैनात सहायक पुलिस निरीक्षक किरण मांधरे गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके अलावा पुलिसकर्मी फिरोज सिद्दीकी, अहमद रजा कुरैशी और अतुल जायसवाल को भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही उलवे पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने तुरंत अतिरिक्त बल मौके पर रवाना किया। भारी पुलिस मौजूदगी के बीच हालात पर काबू पाया गया। इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि अन्य की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
समन्वय की कमी पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक अहम पहलू सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टीम ने छापेमारी से पहले न तो स्थानीय उलवे पुलिस स्टेशन को सूचना दी और न ही नवी मुंबई पुलिस से किसी तरह की सहायता मांगी। इस समन्वय की कमी को भी जांच के दायरे में लिया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे ऑपरेशनों के दौरान आपसी तालमेल और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा।
पुलिस पर हमले को बताया गंभीर अपराध
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करना एक गंभीर अपराध है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ड्रग तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज़ किया जाएगा तथा ऐसे आपराधिक नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उलवे की इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े गिरोह कितने संगठित और हिंसक हो चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर अपराध पर अंकुश लगाया जा सके।
साभार-यश भारत