
मुंबई : आर्थिक राजधानी मुंबई में फरवरी माह के दौरान वायु प्रदूषण ने बीते सात वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शहर और उपनगरों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है, जिससे नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। शनिवार को मुंबई का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 174 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक माना जाता है।
शहर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर औसत से भी अधिक रहा। आर्य चाणक्य नगर में एक्यूआई 181, अंधेरी पूर्व में 161, अणुशक्तीनगर में 173, आरामनगर में 186, वांद्रे पूर्व में 172, बीकेसी में 171, बोरीवली पूर्व में 171, बोरीवली पश्चिम में 176 और चेंबूर में 176 दर्ज किया गया। वहीं, चांदिवली इलाके की स्थिति सबसे गंभीर रही, जहां एक्यूआई 238 तक पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक स्तर माना जाता है।
2020 से 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो सात साल पहले फरवरी महीने में मुंबई का औसत एक्यूआई महज 91 था। इसके बाद अगले दो वर्षों में यह 100 के पार पहुंच गया और फिर लगातार तीन वर्षों तक 100 से 114 के बीच बना रहा। हालांकि इस वर्ष प्रदूषण में असामान्य और तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। बीते सात वर्षों में पहली बार फरवरी माह में एक्यूआई ने इतने खतरनाक स्तर को छुआ है।
वर्तमान हालात को देखते हुए मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 157वें स्थान पर पहुंच गई है। बढ़ता प्रदूषण न केवल पर्यावरण बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खासतौर पर श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब एक्यूआई 150 से 301 के बीच होता है, तब दमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी हो सकती है।
लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए विशेषज्ञों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने और प्रशासन से प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी तेज हो गई है।