Home ताजा खबरचार जिलों में बनेंगे अत्याधुनिक कार्डियक कैथलैब, हृदय रोगियों को मिलेगा समय पर इलाज

चार जिलों में बनेंगे अत्याधुनिक कार्डियक कैथलैब, हृदय रोगियों को मिलेगा समय पर इलाज

by trilokvivechana
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राज्य में हृदय रोगियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने चार जिलों में अत्याधुनिक कार्डियक कैथलैब स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जानकारी देते हुए बताया कि पुणे, जालना, गडचिरोली और कोल्हापुर जिलों में कैथलैब की स्थापना के लिए 99 करोड़ 85 लाख 89 हजार रुपये की मंजूरी दी गई है। राज्य में बढ़ते हृदय रोग और रक्तवाहिनियों से जुड़ी बीमारियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अब तक एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसे उपचारों के लिए मरीजों को मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे उपचार में देरी होने के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक व मानसिक दबाव भी बढ़ता था। नए कैथलैब शुरू होने के बाद जिला स्तर पर ही समय पर जांच और उपचार संभव हो सकेगा।

सरकार ने महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना के अंतर्गत 19 जिलों में कैथलैब शुरू करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें अब तक 12 केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में इन चार नए जिलों को शामिल किया गया है। कोल्हापुर जिले के गडहिंग्लज और शहर के सरकारी अस्पतालों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे आसपास के सांगली, सातारा, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आईसीयू के साथ कैथलैब की सुविधा होने से हृदय की रक्तवाहिनियों में रुकावट का तुरंत पता लगाकर ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार संभव होगा, जिससे मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के क्रियान्वयन में जिला शल्यचिकित्सक, स्वास्थ्य सेवा संचालक, स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे।

परियोजना को ईपीसी पद्धति से लागू किया जाएगा, जिसमें भवन निर्माण, यांत्रिक व विद्युत व्यवस्था, प्लंबिंग, अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद, स्थापना और परीक्षण जैसी सभी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। उपकरणों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार प्री-डिस्पैच और पोस्ट-डिस्पैच रैंडम सैंपल जांच भी की जाएगी।

सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा शुरू होने से जिला स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं अधिक मजबूत और आधुनिक बनेंगी तथा सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को कम खर्च में उच्च स्तरीय हृदय उपचार मिल सकेगा।

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