
भिवंडी: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को आरएसएस से जुड़े एक मानहानि मामले में भिवंडी की अदालत में पेश हुए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका काफिला कोर्ट परिसर पहुंचा। अदालत की प्रक्रिया के दौरान केवल राहुल गांधी और उनके कुछ अधिवक्ता ही कोर्ट कक्ष में मौजूद रहे, अन्य लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। यह मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक कार्यकर्ता द्वारा दायर मानहानि याचिका से संबंधित है। सुनवाई के बाद उनके वकील नारायण अय्यर ने मीडिया को बताया कि यह एक पुराना मामला है, जिसमें जमानत से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण राहुल गांधी की उपस्थिति आवश्यक थी।
जमानतदार के निधन के बाद नई प्रक्रिया
अधिवक्ता अय्यर ने बताया कि इस मामले में पहले जमानतदार रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का निधन हो गया है। ऐसे में अदालत की प्रक्रिया के तहत नए जमानतदार की आवश्यकता पड़ी। इसी सिलसिले में राहुल गांधी आज अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल जमानतदार के रूप में सामने आए हैं और उनके दस्तावेज अदालत में पेश किए गए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मार्च महीने में निर्धारित की है।
एक दिन पहले सुल्तानपुर में भी पेशी
गौरतलब है कि राहुल गांधी एक दिन पहले सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत में भी पेश हुए थे। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी एक टिप्पणी के मामले में सुनवाई हुई थी। लगातार दो दिनों में दो अलग-अलग अदालतों में पेशी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।
रास्ते में दिखाए गए काले झंडे
भिवंडी जाते समय राहुल गांधी को विरोध का भी सामना करना पड़ा। मुंबई से ठाणे की ओर जाते हुए एक टोल नाके पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। इस घटना पर मुंबई युवा कांग्रेस की अध्यक्ष जीनत शबरीन और मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होगी, जैसी दिल्ली में एआई समिट के दौरान विरोध करने वाले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर की गई थी।
क्या है मूल मामला?
भिवंडी कोर्ट में चल रहा यह प्रकरण वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा है। उस समय राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महात्मा गांधी की हत्या से संबंधित टिप्पणी की थी। इस बयान को लेकर संघ से जुड़े राजेश कुंटे ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और अदालत में अपने पक्ष को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करेंगे। अब सभी की निगाहें मार्च में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय होगी।