
मुंबई : मीरा-भाइंदर से वसई-विरार के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है। अब इस दूरी को तय करने में लगने वाला 45 से 60 मिनट का समय घटकर कुछ ही मिनटों में सिमट सकता है। नायगांव खाड़ी पर प्रस्तावित दो मंजिला पुल इस बदलाव की नींव रखेगा। इस पुल के ऊपरी तल पर मेट्रो रेल चलेगी, जबकि निचले तल पर छह लेन का सड़क मार्ग होगा, जिससे वाहन सीधे आवागमन कर सकेंगे। यह परियोजना मेट्रो 13 कॉरिडोर (मीरा-भाईंदर से वसई-विरार) का हिस्सा है। 4.98 किलोमीटर लंबे इस दोमंजिला खाड़ी पुल के प्रस्ताव को एमएमआरडीए की 160वीं बैठक में मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही निविदा और निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पूरा होने पर यह राज्य का पहला दो मंजिला खाड़ी पुल होगा।
फिलहाल मीरा-भाइंदर से वसई-विरार पहुंचने के लिए वाहन चालकों को लंबा घुमावदार मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। यही कारण है कि इस पुल की मांग लंबे समय से स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही थी। नई योजना से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। मेट्रो 9 (दहिसर से मीरा-भाइंदर) के विस्तार के रूप में मेट्रो 13 कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। संशोधित संरेखण और डिजाइन को भी हालिया बैठक में स्वीकृति दी गई है। नायगांव खाड़ी पर दोमंजिला पुल का विचार इसी कॉरिडोर के तहत सामने आया। परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन Delhi Metro Rail Corporation द्वारा किया गया और विस्तृत प्रारूप तैयार किया गया। अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि एक ही संरचना पर मेट्रो और सड़क मार्ग विकसित करना संभव और उपयोगी होगा।
प्रस्तावित पुल 28.60 मीटर चौड़ा होगा। निचले स्तर पर छह लेन की सड़क बनाई जाएगी, जिससे भारी और हल्के वाहन दोनों गुजर सकेंगे। ऊपरी स्तर पर मेट्रो ट्रैक बिछाए जाएंगे, जो मीरा-भाईंदर और वसई-विरार के बीच तेज और सुगम सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराएंगे। इस परियोजना पर लगभग 1,600 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है।
परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा। दैनिक यात्रियों, कार्यालय जाने वालों और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा। मेट्रो सेवा उपलब्ध होने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरणीय लाभ भी मिल सकता है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। नायगांव खाड़ी पर बनने वाला यह दोमंजिला पुल मुंबई महानगर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।