
प्रयागराज। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। प्रयागराज के गंगानगर जोन अंतर्गत झूंसी थाने में उनके विरुद्ध बाल यौन उत्पीड़न से संबंधित गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में उनके शिष्य मुकुंदानंद तथा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है और पॉक्सो एक्ट के तहत धाराएं लगाई गई हैं।
जानकारी के अनुसार, मथुरा-वृंदावन स्थित श्री तुलसी कुंज से संबद्ध छत्तीसगढ़ पीठाधीश्वर के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से की गई शिकायत पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) के निर्देश के बाद यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने शिकायत में वर्णित आरोपों को गंभीर मानते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 351(3) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (पॉक्सो एक्ट) की छह धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसके बाद जांच प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ कर दी गई है।
जांच की प्रक्रिया शुरू
प्राथमिकी में शिकायतकर्ता द्वारा कुछ घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। संबंधित सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। फिलहाल जांच प्रारंभिक अवस्था में है और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में समय लग सकता है।
सामाजिक और धार्मिक हलकों में चर्चा
मामले के सार्वजनिक होते ही धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कुछ लोगों ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि कुछ संगठनों ने कठोर कार्रवाई की आवश्यकता जताई है। दूसरी ओर, शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी प्रकार की टिप्पणी या निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि पॉक्सो कानून के अंतर्गत दर्ज मामलों में जांच अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय तरीके से की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की निजता और अधिकारों की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, और यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
आरोप निराधार साबित होंगे: अविमुक्तेश्वरानंद
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके खिलाफ लगाया गया यौन उत्पीड़न का आरोप असत्य है और अंततः झूठा साबित होगा। उन्होंने जांच में पूर्ण सहयोग देने की बात कही और इसे साजिश करार दिया।
उन्होंने रामभद्राचार्य के शिष्य ब्रह्मचारी आशुतोष महाराज पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह पूर्व में भी कई लोगों पर कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज करा चुका है और लोगों को धमकाकर धन उगाही करता रहा है।