
मुंबई। गर्मी की छुट्टियों में उत्तर भारत जाने वाले यात्रियों के लिए इस बार घर पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। अप्रैल माह की अग्रिम आरक्षण प्रक्रिया शुरू होते ही हालात ऐसे हैं कि महज एक मिनट में सभी सीटें भर जा रही हैं। दूसरे मिनट तक प्रतीक्षा सूची 400 से 500 के पार पहुंच रही है और तीसरे मिनट तक ‘रिग्रेट’ की स्थिति बन जा रही है। ऐसे में यात्रियों की निगाहें अब विशेष ट्रेनों की घोषणा पर टिकी हैं। रेल सूत्रों के अनुसार, गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए मुंबई से उत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों के लिए कुछ विशेष ट्रेनों की अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि यात्रियों का कहना है कि मौजूदा मांग के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।
ऑनलाइन आरक्षण बना चुनौती
मुंबई से बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जाने वाली ट्रेनों में इस समय सबसे अधिक दबाव देखा जा रहा है। रोजी-रोटी के सिलसिले में मुंबई में रह रहे हजारों श्रमिक, कर्मचारी और छोटे कारोबारी हर वर्ष गर्मी में अपने गांव लौटते हैं। इस बार विवाह-समारोहों का सीजन भी अधिक होने से यात्रा की मांग और बढ़ गई है। यात्रियों का कहना है कि ऑनलाइन आरक्षण कर पाना लगभग असंभव हो गया है। बुकिंग शुरू होते ही वेबसाइट की गति धीमी हो जाती है और भुगतान प्रक्रिया पूरी होने तक टिकट प्रतीक्षा सूची में पहुंच जाती है। सामान्य और तत्काल, दोनों श्रेणियों में सीटों की भारी किल्लत है।
काउंटरों पर भी लंबी कतारें
ऑनलाइन व्यवस्था से निराश यात्री रेलवे टिकट काउंटरों का रुख कर रहे हैं। मुंबई के प्रमुख स्टेशनों पर सुबह काउंटर खुलने से पहले ही लंबी कतारें लग जा रही हैं। कई लोग रात से ही लाइन में डेरा डाल रहे हैं, ताकि आरक्षण खुलते ही उन्हें पुष्टि टिकट मिल सके। स्टेशनों पर रोज ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां यात्री घंटों इंतजार कर सिर्फ इस उम्मीद में खड़े हैं कि किसी तरह घर जाने की सीट सुनिश्चित हो जाए। रेलवे प्रशासन से अब अतिरिक्त विशेष ट्रेनों की घोषणा की मांग तेज हो गई है।