
मथुरा/प्रयागराज। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले ने अब नया राजनीतिक और धार्मिक मोड़ ले लिया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जहां एक ओर विवाद गहराया है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप
श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आशुतोष का आपराधिक इतिहास रहा है और वह पूर्व में भी कई विवादों में घिर चुका है। फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने पूर्व में वृंदावन के कथावाचक प्रेमानंद महाराज पर भी धन उगाही के उद्देश्य से आरोप लगाए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता कथित रूप से अपने ऊपर हमले और विदेशी नंबरों से धमकी भरे कॉल आने जैसे मामलों को प्रचारित कर सुरक्षा प्राप्त करने का प्रयास करता रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
प्रधानमंत्री को पत्र, सीबीआई जांच की मांग
फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच नहीं कराई गई तो वे इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे। उनका आरोप है कि शंकराचार्य को एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है।
उन्होंने यह भी मांग की कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सियासत तेज, जांच पर निगाहें
उधर, प्रयागराज में दर्ज मामले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इस संवेदनशील मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं।