
मुंबई में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शहर में अब करीब 54 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 31 लाख दोपहिया हैं। हालात ऐसे हैं कि हर एक किलोमीटर सड़क पर औसतन 2,648 वाहन दौड़ रहे हैं। लगातार बढ़ती गाड़ियों के कारण ट्रैफिक जाम के साथ-साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण भी गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन संख्या पर प्रभावी नियंत्रण की कोई ठोस नीति फिलहाल नजर नहीं आती। दूसरी ओर, शहर की सड़कों की लंबाई और क्षमता इस बढ़ते दबाव के मुकाबले काफी कम है।
सड़कें कम, वाहन ज्यादा
मुंबई में कुल करीब 2,000 किलोमीटर सड़कें हैं, जबकि वाहनों की संख्या 50 लाख से अधिक है। कई प्रमुख मार्गों पर मरम्मत और निर्माण कार्य चलते रहने से उपलब्ध लेन घट जाती हैं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ जाती है। नतीजतन, मुंबईकरों को तय समय से लगभग 75 प्रतिशत अधिक समय सफर में लगाना पड़ता है।
सुबह और शाम के व्यस्त समय में लगभग हर मुख्य मार्ग पर भारी भीड़ रहती है। फिलहाल करीब 40 प्रतिशत लोग निजी वाहन से सफर करना पसंद करते हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता अपेक्षाकृत कम है।
प्रदूषण की दोहरी मार
वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ ही जाम के दौरान लगातार हॉर्न बजाने की आदत से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हैं।
अन्य शहरों से तुलना
वाहन घनत्व के मामले में मुंबई देश के बड़े शहरों में सबसे आगे है। यहां प्रति किलोमीटर 2,648 वाहन हैं। इसके मुकाबले चेन्नई में 1,762, कोलकाता में 1,283, बेंगलुरु में 1,134 और दिल्ली में 261 वाहन प्रति किलोमीटर दर्ज किए गए हैं।
अगर कुल सड़कों और वाहनों की तुलना करें तो दिल्ली में 33,198 किलोमीटर सड़कें और 1.54 करोड़ वाहन हैं, जबकि मुंबई में केवल 1,941 किलोमीटर सड़कें और 53 लाख वाहन हैं। यह अंतर बताता है कि मुंबई पर दबाव अधिक है।
हर साल बढ़ रही गाड़ियों की संख्या
2020 में शहर में 39 लाख वाहन थे। यह संख्या 2021 में 41 लाख, 2022 में 43.5 लाख, 2023 में 45.5 लाख, 2024 में 50 लाख और 2025 में 53 लाख तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी चिंता का विषय मानी जा रही है।
जाम से आर्थिक नुकसान
अनुमान है कि निजी वाहन रोज 10 से 15 किलोमीटर चलते हैं और जाम में हर वाहन का कम से कम एक लीटर ईंधन बर्बाद होता है। इससे प्रतिदिन लगभग 15 लाख लीटर ईंधन की खपत व्यर्थ जाती है।
एक आम नागरिक रोजाना करीब तीन घंटे ट्रैफिक में बिताता है। यदि औसत दैनिक आय 1,000 रुपये मानी जाए, तो लगभग 70 लाख यात्रियों का रोजाना 210 करोड़ रुपये के बराबर समय जाम में नष्ट हो जाता है।
सुरंग परियोजनाओं पर बड़ा निवेश
मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने 2026-27 के बजट में 70 किलोमीटर लंबी एकीकृत सुरंग परियोजनाओं के लिए करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है।
प्रमुख परियोजनाओं में बांद्रा-वरली सी लिंक से एयरपोर्ट-टी तक 16 किलोमीटर, ऑरेंज गेट से मरीन ड्राइव 9.42 किलोमीटर और ठाणे से बोरीवली 11.8 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल हैं।
क्या यही समाधान है?
यातायात विशेषज्ञ ए.वी. शेणॉय का कहना है कि महंगे प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उनके वास्तविक लाभ का आकलन जरूरी है। जब तक वाहन संख्या पर अंकुश नहीं लगेगा, जाम की समस्या खत्म नहीं होगी।
वनशक्ति के निदेशक स्टालिन डी का मानना है कि अधिक सड़कें बनाना स्थायी समाधान नहीं है। सार्वजनिक परिवहन, खासकर बस सेवाओं और मौजूदा ढांचे में निवेश बढ़ाना ही ट्रैफिक समस्या से निपटने का प्रभावी रास्ता हो सकता है।
स्पष्ट है कि मुंबई को बढ़ते ट्रैफिक संकट से उबारने के लिए केवल नई परियोजनाएं ही नहीं, बल्कि संतुलित और दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।