मीठी नदी गाद घोटाले में बड़ा खुलासा, 7000 पन्नों की दूसरी चार्जशीट दाखिल, फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की निकासी का आरोप, दो आरोपी नामजद

मुंबई : मुंबई की मीठी नदी में गाद निकासी से जुड़े कथित 65.5 करोड़ रुपये के घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बुधवार को एस्प्लेनेड कोर्ट (किला कोर्ट) में करीब 7000 पन्नों की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में गिरफ्तार दो आरोपियों महेश पुरोहित और सुनील उपाध्याय के नाम शामिल किए गए हैं। जांच दस्तावेजों में कुल 39 गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं, जिनके आधार पर एजेंसी ने घोटाले की परतें खोलने का दावा किया है।

ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार दोनों आरोपियों पर किसानों के नाम पर डंपिंग ग्राउंड के लिए फर्जी समझौता ज्ञापन तैयार करने और उन्हें वास्तविक दस्तावेज के रूप में पेश कर भुगतान हासिल करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि इन कथित जाली दस्तावेजों के आधार पर गाद निकासी के भुगतान बिलों को मंजूरी दिलाई गई। एजेंसी ने दोनों आरोपियों को पिछले वर्ष दिसंबर में गिरफ्तार किया था।

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के तूफानी जल निकासी विभाग के कुछ अधिकारियों ने 2013 से 2023 के बीच ठेकेदारों और बिचौलियों के साथ मिलकर कथित साजिश रची। आरोप है कि किसानों के नाम पर डंपिंग साइट्स के लिए फर्जी समझौता ज्ञापन तैयार किए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि नदी से निकाली गई गाद निर्धारित स्थानों पर डंप की जा रही है। इसी आधार पर भुगतान के बिल स्वीकृत किए गए।

जांच एजेंसी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी वजन मापने की रसीदें और लॉग शीट भी तैयार की गईं, जिससे यह दर्शाया जा सके कि बड़ी मात्रा में गाद निकासी का काम किया गया है। हालांकि प्रारंभिक जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कागजों पर दिखाए गए काम का वास्तविकता से कोई मेल नहीं मिला।

ईओडब्ल्यू इससे पहले भी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। नवंबर 2025 में एजेंसी ने एस्प्लेनेड कोर्ट में लगभग 1300 पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल की थी। उस चार्जशीट में मेसर्स मेनदीप एंटरप्राइजेज के मालिक राठौर को मुख्य आरोपी बनाया गया था। राठौर को अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया था और उस पर गाद निकासी परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

मीठी नदी से गाद हटाने के लिए बीएमसी द्वारा एक व्यापक परियोजना तैयार की गई थी, जिसका उद्देश्य नदी की जलधारा को साफ रखना और बाढ़ की संभावनाओं को कम करना था। लेकिन जांच में सामने आया कि इस परियोजना के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि वास्तविक काम किए बिना ही फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में मुंबई पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। बाद में विस्तृत वित्तीय जांच के लिए मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दिया गया। ईओडब्ल्यू अब इस घोटाले से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

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