मुंबई। बोरीवली तहसीलदार कार्यालय में कार्यरत एक तलाठी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी द्वारा की गई शिकायत के बाद जमीन हड़पने के कथित षड्यंत्र का मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों और कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई पार्टनरशिप डीड के जरिए करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा करने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत के आधार पर काशिमिरा पुलिस स्टेशन में एक महिला सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार विलेपार्ले निवासी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी रवि कमलेश्वर पुजारी की शिकायत पर काशिमिरा पुलिस ने राजेश कुमार झा, विकास सिंह, मनोज कुमार सिंह और सुरेखा नारखेडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर के मुताबिक राजेश कुमार झा और विकास सिंह ने पुजारी की निष्क्रिय कंपनी ‘किरण कंस्ट्रक्शन’ को खरीदने के लिए एक समझौता किया था। इस समझौते में यह स्पष्ट शर्त रखी गई थी कि कंपनी के नाम पर दर्ज वसई की करीब 16 एकड़ और गोरेगांव की लगभग 725 वर्ग मीटर जमीन पर स्वामित्व अधिकार पुजारी परिवार के पास ही रहेगा।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने गोरेगांव स्थित जमीन के लिए संभावित खरीदार तलाशने और संबंधित दस्तावेज दिखाने के बहाने संपत्ति के मूल कागजात अपने कब्जे में ले लिए। बाद में जब दस्तावेज वापस मांगे गए तो उन्हें लौटाने में लगातार टालमटोल की जाती रही।
पुजारी का दावा है कि आरोपियों ने उनकी जानकारी और सहमति के बिना मूल करारनामे के कुछ महत्वपूर्ण पन्ने हटाकर एक कथित फर्जी पार्टनरशिप डीड तैयार कर ली। इस दस्तावेज के आधार पर कंपनी की संपत्तियों में नए भागीदारों का अधिकार दिखाया गया। इसके बाद एक और नई पार्टनरशिप डीड तैयार कर मनोज कुमार सिंह और सुरेखा नारखेडे को कंपनी का भागीदार बताया गया।
आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में भी बदलाव कराया गया और जमीन के सातबारा (7/12) रिकॉर्ड में नए नाम दर्ज करा दिए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में गोरेगांव क्षेत्र के तलाठी विक्रम बाद की भूमिका भी संदिग्ध है, जिन्होंने पर्याप्त जांच किए बिना ही नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी।
इस मामले को लेकर पुजारी ने बोरीवली तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
काशिमिरा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र कांबले ने बताया कि शिकायत के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पुलिस दस्तावेजों की सत्यता, राजस्व अभिलेखों में हुए बदलाव और इस प्रक्रिया में किसी सरकारी अधिकारी की संभावित भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने प्रशासनिक तंत्र और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।