जौनपुर : उत्तर प्रदेश के Jaunpur जिले के सरपतहां थाना क्षेत्र के बासगांव में पुश्तैनी जमीन के विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रही है। इस मामले ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित ऋषिकेश मिश्रा का कहना है कि विवाद की जड़ पुश्तैनी जमीन का बंटवारा है, लेकिन अब यह मामला साधारण पारिवारिक विवाद से आगे बढ़कर दबाव और प्रभाव के इस्तेमाल तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरीशंकर मिश्रा नामक व्यक्ति उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और अपने प्रभाव का उपयोग कर मामले को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रहा है।
पीड़ित के अनुसार, आरोपी के पारिवारिक संबंध भी प्रभावशाली पदों से जुड़े बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, गौरीशंकर मिश्रा के दामाद जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर बताए जा रहे हैं, जबकि उनके एक रिश्तेदार उत्तर प्रदेश पुलिस के खुफिया विभाग में डीआईजी पद पर तैनात बताए जाते हैं। आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते मामले में दबाव का माहौल बन गया है।
ऋषिकेश मिश्रा ने यह भी कहा कि इस समय उनके पिता अपने बीमार पिता की सेवा के लिए मुंबई में हैं। घर के बड़े सदस्य की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उन पर मानसिक और सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें डराने और परेशान करने की कोशिश भी की जा रही है।
इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि आरोपी खुद थाने पहुंचकर अपने प्रभाव का हवाला देता है और पुलिस पर दबाव बनाता है कि पीड़ित के खिलाफ ही मामला दर्ज किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कुछ उच्च अधिकारियों के फोन भी थाने तक पहुंच रहे हैं, जिससे पुलिस पर दबाव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। आरोप है कि इसी कारण मामले की दिशा बदलने की कोशिश की जा रही है।
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या पुलिस पूरी तरह कानून और नियमों के आधार पर कार्रवाई कर पाएगी या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में निर्णय लिए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन और सुरक्षा की गुहार लेकर थाने पहुंचे और उसे ही आरोपी बनाने की स्थिति बन जाए, तो यह आम लोगों के भरोसे के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि जांच पारदर्शी तरीके से की जाए और संबंधित कॉल रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक हस्तक्षेप की भी पड़ताल हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जौनपुर पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है। क्या जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होगी या फिर यह विवाद भी दबाव और प्रभाव के बीच उलझ कर रह जाएगा। फिलहाल पीड़ित पक्ष निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।