महाराष्ट्र में उद्योगों को बड़ी राहत: अनुमति प्रक्रिया आसान, बिजली दरों में होगी कमी

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि राज्य में औद्योगिक अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है और आने वाले वर्षों में बिजली दरों में भी चरणबद्ध कमी की जाएगी। सरकार के इन कदमों से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि राज्य में मौजूद 33 औद्योगिक परवानगियों में से 20 को अब स्व-प्रमाणन (सेल्फ सर्टिफिकेशन) के दायरे में लाया गया है। यानी उद्योगों को अब कई प्रक्रियाओं के लिए लंबी सरकारी मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। शेष 13 परवानगियों को भी कम करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे उद्योग स्थापित करना और आसान हो सके।

यह बैठक ‘बल्क ड्रग पार्क’ और ‘लाइफ साइंसेस हब’ के विकास को लेकर बुलाई गई थी, जिसमें उद्योग और चिकित्सा क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। सरकार इन क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार मान रही है।

बिजली दरों को लेकर भी सरकार ने राहत का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा ₹10.88 प्रति यूनिट की दर को अगले पांच वर्षों में घटाकर करीब ₹9.97 प्रति यूनिट तक लाने का लक्ष्य है। उनका दावा है कि 2028-29 तक महाराष्ट्र देश में सबसे कम बिजली दर वाला राज्य बन सकता है, जिससे उद्योगों की लागत में बड़ी कमी आएगी।

उद्योगों को पारदर्शी और तेज सेवाएं देने के लिए सरकार ने मैत्री पोर्टल को और सशक्त बनाया है। अब इस एकल प्लेटफॉर्म के जरिए सभी जरूरी मंजूरियां ली जा सकेंगी। साथ ही, हर आवेदन की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी और तय समयसीमा में काम पूरा न होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

सरकार हरित और टिकाऊ औद्योगिक विकास पर भी विशेष जोर दे रही है। इसके तहत कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), सर्क्युलर इकॉनॉमी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग पर्यावरण के अनुकूल बन सकें।

इसके अलावा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को भी इस विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। बड़े उद्योगों के साथ उनके सप्लायर नेटवर्क को प्रोत्साहन देने और विभिन्न रियायतें देने की योजना तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार “नो नॉनसेंस बिजनेस” की नीति पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल देना है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन सुधारों से महाराष्ट्र देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

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