Home ताजा खबरहाथी रोग उन्मूलन अभियान को मिली नई गति, ट्रिपल ड्रग थेरेपी के जरिए 2027 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

हाथी रोग उन्मूलन अभियान को मिली नई गति, ट्रिपल ड्रग थेरेपी के जरिए 2027 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

by trilokvivechana
0 comments

मुंबई: महाराष्ट्र सहित पूरे देश में हाथी रोग (लिम्फैटिक फाइलेरियासिस) के उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर अभियान को तेज कर दिया है। इस दिशा में ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ यानी आईडीए (आयवरमेक्टिन, डीईसी और अल्बेंडाजोल) को प्रभावी हथियार के रूप में अपनाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 तक देश को इस गंभीर बीमारी से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है और महाराष्ट्र इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पारंपरिक उपचार पद्धतियों की तुलना में ट्रिपल ड्रग थेरेपी अधिक कारगर साबित हो रही है। इस उपचार में तीन दवाओं का संयुक्त उपयोग कर शरीर में मौजूद माइक्रोफिलेरिया यानी परजीवियों को तेजी से समाप्त किया जाता है, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में महाराष्ट्र ने केंद्र से विदर्भ क्षेत्र को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था, जिसका सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है।

केंद्र सरकार के सहयोग से ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ अभियान के तहत देश के 12 राज्यों में बड़े स्तर पर दवा वितरण किया जा रहा है। महाराष्ट्र में भी चयनित जिलों में इस उन्नत पद्धति को लागू किया गया है। राज्य सरकार ने करीब 55 लाख लोगों तक इस अभियान का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे व्यापक स्तर पर संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा सके।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हाथी रोग का सबसे अधिक प्रभाव विदर्भ क्षेत्र में देखा गया है। गडचिरोली, भंडारा, चंद्रपुर, नागपुर और गोंदिया जिले इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित हैं। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कुल मामलों में से लगभग 75 प्रतिशत मरीज केवल नागपुर विभाग में दर्ज किए गए हैं, जो इस क्षेत्र की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

हालांकि, अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में माइक्रोफिलेरिया दर को वर्ष 2014 के 4.91 प्रतिशत से घटाकर 2024 तक 1 प्रतिशत से भी कम करने में सफलता मिली है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आईडीए उपचार संक्रमण को तेजी से नियंत्रित करने में सक्षम है और इससे भविष्य में बीमारी के प्रसार को रोका जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें और किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों के निर्देशों का पालन करते हुए नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना बेहद जरूरी है, तभी इस बीमारी का पूरी तरह उन्मूलन संभव होगा।

विशेषज्ञों ने भी जोर देकर कहा है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। यदि जनसहयोग सुनिश्चित किया जाता है, तो 2027 तक हत्तीरोग मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव हो सकता है।

You may also like

Leave a Comment

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?
-
00:00
00:00
Update Required Flash plugin
-
00:00
00:00