मुंबई में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज, मिठी नदी और नालों की सफाई अभियान को मिली रफ्तार

मुंबई। मानसून से पहले बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मिठी नदी और शहर के बड़े तथा छोटे नालों की सफाई का काम तेज कर दिया है। गाद निकालने का यह व्यापक अभियान तीन अलग अलग पैकेजों के तहत चलाया जा रहा है, जिसे तय समय सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या होती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी समाधान सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि बरसात के दौरान नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नालों की सफाई से जुड़ा पूरा कार्यक्रम, यानी काम कब शुरू होगा और कब समाप्त होगा, इसकी जानकारी नगर निगम के डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराई जाए। इससे नागरिक अपने क्षेत्र में चल रहे कार्य की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, ठेकेदारों द्वारा उपयोग में लाई जा रही मशीनों और रोजाना की प्रगति का विवरण भी नियमित रूप से ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

तीन अप्रैल 2026 को अभिजीत बांगर ने स्वयं विभिन्न स्थलों का दौरा कर कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने बांद्रा कुर्ला परिसर स्थित कनेक्टर पुल, जेतवन उद्यान के पास स्थित एमएमआरडीए कार्यालय क्षेत्र और अंबानी स्कूल के आसपास चल रहे कार्यों की समीक्षा की। इसके अलावा मुलुंड पूर्व के बाउंड्री नाला और घाटकोपर के सोमैया नाला का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।

नगरपालिका ने इस अभियान की शुरुआत 12 मार्च 2026 से की है और इसे 31 मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मिठी नदी में पांच प्रमुख स्थानों पर गाद निकालने का काम चल रहा है, जिन्हें तीन अलग अलग हिस्सों में बांटा गया है।

अभियान के दौरान पारदर्शिता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बांगर ने साफ कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभियंताओं की मौके पर उपस्थिति अनिवार्य करते हुए चेतावनी दी कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आई तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस बार सफाई अभियान में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। नालों में बहकर समुद्र में जाने वाले कचरे को रोकने के लिए ट्रैश बूम प्रणाली लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही जहां संभव हो, वहां गाद निकालने के लिए नई तकनीक और नवाचार उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।

मुलुंड, भांडुप, चुनाभट्टी और घाटकोपर जैसे क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को ध्यान में रखते हुए विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निकाली गई गीली गाद को पहले 48 घंटे तक सुखाया जाए, उसके बाद ही उसे हटाया जाए। साथ ही हर दिन के कार्य की जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

नगरपालिका का मानना है कि इस बार बेहतर योजना, नई तकनीक और सख्त निगरानी के जरिए मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। यह अभियान शहर को सुरक्षित और सुचारु रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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