
मुंबई। महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार सोमवार 6 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इस चुनाव को लेकर अब निर्विरोध जीत की कोशिशें भी तेज होती नजर आ रही हैं, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत कर उपचुनाव में समर्थन देने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही कांग्रेस से भी सहयोग लेने की कोशिशें जारी हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस इस सीट को बिना मुकाबले जीतने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।
नामांकन के दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी उपस्थित रहने की संभावना है। इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। बारामती सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई थी। उनके अचानक निधन के बाद यह सीट राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन गई है। अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुनेत्रा पवार मैदान में उतर रही हैं। अजित पवार का इस सीट पर लंबे समय तक प्रभाव रहा है। वे बारामती से आठ बार विधायक चुने गए थे, जिसके कारण यह क्षेत्र उनका मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में इस उपचुनाव को केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस (एसपी) ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लिया है। हालांकि, उसकी सहयोगी कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि चुनाव को पूरी तरह एकतरफा नहीं होने दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष एकजुट होता है तो मुकाबला रोचक हो सकता है, वहीं अगर समर्थन का समीकरण बनता है तो यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मुकाबला एकतरफा रहेगा या फिर यहां कड़ा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिलेगा।