मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी Mumbai में रसोई गैस की कमी का असर अब आम लोगों के पसंदीदा नाश्ते पर भी साफ दिखाई देने लगा है। धारावी की गलियों में चलने वाला इडली-वड़ा और डोसा बनाने का बड़ा कारोबार इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। गैस आपूर्ति में बाधा के चलते यहां की लगभग 70 प्रतिशत छोटी-बड़ी इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे न केवल कारोबार ठप पड़ा है बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है।
धारावी, जहां से मुंबई के कई हिस्सों में इडली, वड़ा और डोसा की आपूर्ति होती है, अब लगभग सन्नाटे में बदलता नजर आ रहा है। छोटे घरों से लेकर लघु उद्योगों तक फैला यह कारोबार पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर है। गैस की कमी के चलते उत्पादन रुक गया है और स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
थोक विक्रेता राज नादर ने बताया कि उनकी इकाई में पहले 10 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन अब केवल 2 ही बचे हैं। बाकी कर्मचारी काम ठप होने के कारण अपने गांव लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि गैस संकट शुरू होने के बाद से ही उत्पादन लगातार घटता गया और अब हालात ऐसे हैं कि काम बंद करना पड़ा है।
धारावी में इडली बनाने वाली लगभग 6 बड़ी इकाइयां रोजाना 50 हजार से लेकर 1 लाख तक इडली तैयार करती थीं। ये इडली मुंबई के अलग-अलग इलाकों में भेजी जाती थीं, जहां सड़क किनारे ठेले और छोटे होटल इन्हें बेचते थे। लेकिन अब इन छह में से चार इकाइयों पर ताले लग चुके हैं, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, इस संकट की शुरुआत मार्च के दूसरे सप्ताह से ही हो गई थी। 12 मार्च के आसपास ही दुकानों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया था, लेकिन अब स्थिति और बिगड़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर की किल्लत के साथ-साथ कालाबाजारी भी बढ़ गई है, जिससे सामान्य दरों पर सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है।
कारोबारियों को दुकान का किराया और कर्मचारियों का वेतन देना भी भारी पड़ रहा है। वहीं, घरों से छोटे स्तर पर काम करने वाले लोग भी हताश हो चुके हैं। उनका कहना है कि पिछले दो हफ्तों से काम पूरी तरह ठप है और अब उम्मीद भी खत्म होती जा रही है। कई परिवारों ने बच्चों की परीक्षाएं खत्म होते ही गांव लौटने का निर्णय ले लिया है।
इस संकट का सीधा असर मुंबईकरों पर भी पड़ा है। शहर में इडली-वड़ा जैसे लोकप्रिय नाश्ते की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट और गहराएगा और छोटे कारोबार पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करे, ताकि इस पारंपरिक नाश्ता उद्योग को बचाया जा सके।