मराठी नहीं बोलने वाले ऑटो चालकों पर सख्ती की तैयारी, परमिट की होगी दोबारा जांच

भाईंदर। महाराष्ट्र में ऑटो चालकों के लिए अब नियम और सख्त होने जा रहे हैं। मराठी भाषा न बोल पाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को ऑटो परमिट की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद हजारों चालकों के लाइसेंस पर संकट गहरा सकता है। दरअसल, राज्य के विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में ऑटो चालकों को परमिट जारी किए गए हैं, जिनके आधार पर वे सड़कों पर वाहन चला रहे हैं। नियमों के मुताबिक, परमिट उन्हीं लोगों को दिया जाता है, जो सभी आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें पूरी करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में फर्जी कागजात के जरिए परमिट हासिल करने के कई मामले सामने आए हैं, जिससे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।

मीरा भाईंदर, वसई-विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं, जहां नियमों की अनदेखी कर परमिट जारी किए गए। इसी के चलते अब सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में ऑटो परमिट की व्यापक समीक्षा का फैसला किया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी परमिट की गहन जांच करें और 1 मई तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपें। इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि संबंधित चालक को मराठी भाषा का ज्ञान है या नहीं। यदि कोई चालक इस शर्त को पूरा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें परमिट रद्द करने तक की संभावना शामिल है।

महाराष्ट्र में ऑटो चालक बनने के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य माना गया है। इसका उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच सहज और स्पष्ट संवाद सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान न केवल सेवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए भी आवश्यक है।

इस फैसले के बाद परिवहन विभाग सक्रिय हो गया है और विभिन्न शहरों में जांच की तैयारी शुरू कर दी गई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने चालक इस जांच में खरे उतरते हैं और कितनों पर कार्रवाई की गाज गिरती है।

फिलहाल, सरकार के इस कदम को नियमों के पालन और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वहीं, ऑटो चालकों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता और चर्चा का माहौल भी देखा जा रहा है।

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