पटना। बिहार के किशनगंज जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा बलों की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 19वीं बटालियन के एक हेड कांस्टेबल पर अपने ही साथी जवान की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। घटना के बाद इलाके और बटालियन परिसर में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार शाम की है। आरोपी हेड कांस्टेबल उसी बटालियन में तैनात है, जहां पीड़िता के पिता भी कार्यरत हैं। आरोप है कि उसने भरोसे का फायदा उठाते हुए मौका पाकर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया और मामला तुरंत पुलिस तक पहुंचाया गया।
सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। रविवार को आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए किशनगंज जेल स्थानांतरित कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और उसका बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। जांच एजेंसियां इस बात को सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि सभी साक्ष्य विधिवत एकत्र किए जाएं, ताकि अदालत में मजबूत मामला पेश किया जा सके और दोषी को सख्त सजा दिलाई जा सके।
किशनगंज ग्रामीण क्षेत्र के एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
घटना के बाद बटालियन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि भरोसे और नैतिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस सुरक्षा तंत्र पर समाज की रक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी के भीतर इस तरह की घटना सामने आना चिंताजनक है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषी को हर हाल में कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।