माहुल खाडी (Mahul Creek), मुंबई — जैवविविधता और प्रदूषण की दोहरी कहानी

(त्रिलोक विवेचना के संपादक एवं जन पर्यावरण संरक्षण संघ के अध्यक्ष संदीप त्रिलोकीनाथ शुक्ला के ७ अप्रैल २०२६ के निरीक्षण सहित)

मुंबई की पूर्वी तट रेखा पर स्थित माहुल खाडी खारे पानी के जंगलों (mangroves), ज्वारीय दलदलों (tidal mudflats) और हजारों जलपक्षियों से समृद्ध एक क्षेत्र है। लेकिन औद्योगिक प्रदूषण, रासायनिक कचरा और तेल रिसाव के कारण यह खाडी आज गंभीर संकट में है।

खाडी की समृद्ध जैवविविधता (२००१-२००२ के सर्वेक्षण के अनुसार)

  • १४९ पक्षी प्रजातियाँ (Avifauna) — जिनमें फ्लेमिंगो, गल्स (gulls) और अन्य जलचर पक्षी प्रमुख हैं।
  • हर वर्ष २०,०००+ जलपक्षी आते हैं।
  • अन्य जीव: ७ स्तनधारी, १० सरीसृप, १० मछलियाँ, २८ तितलियाँ आदि।
  • निवास स्थान: खारफुटी, ज्वारीय पूर मैदान, नमक के मैदान (saltpans)।
  • रामसर स्थल (Ramsar site) घोषित करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त। वर्तमान चिंताजनक स्थिति — प्रदूषण
    ७ अप्रैल २०२६ को पर्यावरण प्रेमी संदीप त्रिलोकीनाथ शुक्ला ने सहयोगियों के साथ माहुल खाडी क्षेत्र का दौरा किया। समुद्र के पानी के कुछ बूंद उनके शर्ट पर पड़ते ही वे काले हो गए। यह घटना खाडी में तेल, रसायन और औद्योगिक कचरे के घुलने का स्पष्ट प्रमाण है।

माहुल क्षेत्र का प्रदूषित पानी और औद्योगिक प्रभाव समुद्री जीवन, खारफुटी तथा पक्षी जीवन को गंभीर खतरे में डाल रहा है।

माहुल खाडी में प्रदूषण दर्शाते दृश्य (Polluted industrial waterfront near Mahul/Chembur):

(इस क्षेत्र में BPCL रिफाइनरी, विद्युत संयंत्र और अन्य उद्योगों के कारण पानी और हवा दोनों गंभीर रूप से प्रदूषित हैं।)

क्या जरूरी है?

  • महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), भारतीय तटरक्षक दल और मुंबई महानगरपालिका को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
  • कंपनियों से Zero Liquid Discharge और कानून का सख्त पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • खारफुटी का संरक्षण और खाडी का पुनरुद्धार किया जाए।

संदीप त्रिलोकीनाथ शुक्ला का आह्वान:
“मुंबई की पूर्वी तट रेखा पर स्थित यह संवेदनशील खाडी बचाना हमारा सामूहिक दायित्व है। प्रदूषण रोकना और जैवविविधता को संरक्षित करना अब अत्यंत आवश्यक है।”

ये तस्वीरें माहुल खाडी की सुंदरता और दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता दोनों को दिखाती हैं — एक ओर फ्लेमिंगो वाले हरे-भरे खारफुटी वाले जंगल, दूसरी ओर काला-प्रदूषित पानी। यह दोहरी सच्चाई मुंबई के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करती है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक रहें!

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