“मराठी क्यों नहीं?” सवाल उठते ही बीएमसी और पुलिस पर बढ़ा दबाव
मुंबई। मुंबई के मालाड ईस्ट इलाके में भाषा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक हलचल मचा दी है। दत्ता मंदिर रोड क्षेत्र में दुकानों के साइनबोर्ड पर गुजराती भाषा के उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। “मराठी क्यों नहीं?” जैसे सवाल उठाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब “Malad Culture” नाम के एक इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो साझा किया गया। वीडियो में एक व्यक्ति इलाके की दुकानों के बाहर लगे साइनबोर्ड दिखाते हुए सवाल करता नजर आता है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। वीडियो में कई दुकानों के बोर्ड केवल गुजराती भाषा में दिखाई देने का दावा किया गया है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
महाराष्ट्र में मराठी को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है और नियमों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों, विशेषकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइनबोर्ड पर मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। ऐसे में इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नियम मौजूद हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
विवाद बढ़ने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे बहुभाषी शहर में भाषाई संतुलन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन साथ ही स्थानीय भाषा और संस्कृति का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस घटना ने एक बार फिर भाषा और पहचान के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और क्या साइनबोर्ड से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।