मुंबई। राज्य में कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से देवेंद्र फडणवीस सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘मासूम’ योजना को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करते हुए 121 बाल देखभाल संस्थानों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। यह पहल उन बच्चों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो त्याग, शोषण, मानसिक आघात और असुरक्षित माहौल जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना को Aditya Birla Education Trust की ‘एमपॉवर’ पहल के सहयोग से लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएं देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सशक्त बनाना भी उतना ही जरूरी है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच योजना के सीमित दायरे में 20 केंद्रों पर लागू रहने के दौरान 1,861 बच्चों को इसका लाभ मिला। इस अवधि में 5,000 से अधिक काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए, जिनके परिणामस्वरूप बच्चों के व्यवहार, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मूल्यांकन में यह सामने आया कि नियमित मार्गदर्शन और सहयोग से बच्चों में सकारात्मक बदलाव संभव है।
‘मासूम’ योजना की शुरुआत फरवरी 2023 में हुई थी। प्रारंभिक चरण में इसे मुंबई, ठाणे, पुणे, नाशिक और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों तक सीमित रखा गया था। अब इसके विस्तार के साथ अनाथ बच्चे, मानव तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चे, परिवार से अलग हुए बच्चे और कानून से जुड़े मामलों में रह रहे बच्चों को भी व्यापक रूप से इसका लाभ मिलेगा।
इस योजना के तहत प्रशिक्षित काउंसलर बच्चों को मानसिक आघात से उबारने के लिए निरंतर सहायता प्रदान करेंगे। आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा उपचार और व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। कई मामलों में दीर्घकालिक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहयोग की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही कला-आधारित थेरेपी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बच्चे अपनी भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त कर सकें।
सरकार भविष्य में कुछ केंद्रों पर कार्य-आधारित (वर्क थेरेपी) कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बना रही है, जिससे बच्चों के कौशल विकास के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे बच्चों की संवेदनशील जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के विस्तार के साथ प्रत्येक बच्चे तक उसकी आवश्यकता के अनुरूप सहायता पहुंचाना प्राथमिकता होगी। साथ ही, योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा कर इसकी गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
‘मासूम’ योजना को सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से संचालित एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और उज्जवल भविष्य की दिशा भी प्रदान कर रही है।
महाराष्ट्र में ‘मासूम’ योजना का विस्तार: 121 देखभाल गृहों के बच्चों को मिलेगा मानसिक सहारा
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