अकोला/मुंबई — बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और सामाजिक चुनौतियों के बीच जहां अधिकांश लोग अपनी सीमित दुनिया में व्यस्त हैं, वहीं डॉ. सचिन बाजीराव खंडारे ने समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। उनका लक्ष्य साफ है—“हर किसी को वृक्षों की छांव और जीवन में सुकून मिले।”
अकोला जिले के मूल निवासी डॉ. खंडारे पिछले कई वर्षों से लगातार वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं। उनका मानना है कि बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय संकट से निपटने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय पेड़ लगाना है। इसी सोच के साथ वे गांवों से लेकर मुंबई उपनगर तक विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
लेकिन उनकी पहचान केवल पर्यावरण प्रेमी तक सीमित नहीं है। वे एक समर्पित समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है। वे समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों, शैक्षणिक मार्गदर्शन और सामाजिक अभियानों के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद करते हैं।
उच्च शिक्षित डॉ. खंडारे ने समाजसेवा (एम.एस.डब्ल्यू) में शोध किया है और कई शैक्षणिक विषयों में एम.ए. तथा एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की है। किसानों और सामाजिक मुद्दों पर उनके शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत और प्रकाशित हो चुके हैं। उनका अध्ययन और अनुभव समाजहित में उनके कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाता है।
विद्यार्थियों के बीच वे एक मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में विशेष स्थान रखते हैं। आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों को वे निःशुल्क सहायता और दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। कई छात्र मानते हैं कि उनकी निःस्वार्थ मदद ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। अपरिचित विद्यार्थियों की भी वे अभिभावक की तरह सहायता करते हैं, जो आज के समय में दुर्लभ उदाहरण माना जाता है।
उनकी इस सेवा यात्रा में उनकी पत्नी डॉ. निवेदिता सचिन खंडारे का भी महत्वपूर्ण योगदान है। वे चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से मरीजों का इलाज करती हैं और समाज के कमजोर वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
डॉ. खंडारे का परिवार भी शिक्षा और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उनके पुत्र यशराज खंडारे चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखते हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी शिक्षा और समाजसेवा में सक्रिय हैं। यह परिवार आज सामाजिक जिम्मेदारी और मूल्यों का उदाहरण बनकर उभरा है।
अकोला, जो विदर्भ क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और कृषि प्रधान जिला है, ने भी डॉ. खंडारे के व्यक्तित्व को आकार देने में भूमिका निभाई है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक जागरूकता और प्रकृति से जुड़ाव उनके कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
डॉ. खंडारे का मानना है कि “पेड़ केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन का आधार हैं।” उनकी सोच और कार्य यह साबित करते हैं कि यदि एक व्यक्ति ठान ले, तो वह समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
आज जब दुनिया पर्यावरण संकट और सामाजिक असमानताओं से जूझ रही है, ऐसे में डॉ. सचिन खंडारे जैसे लोग उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रहे हैं—जो न केवल पेड़ लगा रहे हैं, बल्कि इंसानियत की जड़ों को भी मजबूत कर रहे हैं।