कल्याण-डोंबिवली शहर में गहराते जल संकट ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप ले लिया है। सोमवार को नगर निगम की महासभा में यह मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठा, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने एक सुर में प्रशासन पर सवालों की बौछार कर दी। शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत के साथ-साथ गंदे और मटमैले पानी की आपूर्ति ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
पार्षदों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के कुछ कर्मचारी और अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर हाउसिंग सोसायटियों को चोरी-छिपे पानी बेच रहे हैं। इसके बदले हर महीने 7 से 8 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। इस कथित ‘पानी माफिया’ के चलते आम करदाता नागरिकों को नियमित जल आपूर्ति से वंचित रहना पड़ रहा है।
महासभा में चर्चा के दौरान माहौल काफी गरम रहा। अधिकारियों से जवाब मांगते हुए पार्षदों ने कहा कि जहां कुछ चुनिंदा सोसायटियों को अवैध रूप से भरपूर पानी दिया जा रहा है, वहीं शहर के कई हिस्सों में दो-दो, तीन-तीन दिन तक नल सूखे रहते हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में पानी खरीदना पड़ रहा है—चार बर्तनों के लिए 100 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। खासकर झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में पानी की अवैध बिक्री का धंधा खुलेआम चलने के आरोप लगाए गए।
गंदे पानी का मुद्दा भी बैठक में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस पार्षद समीना शेख ने बैलबाजार और गोविंदवाड़ी क्षेत्रों में मटमैले पानी की आपूर्ति का मामला उठाते हुए इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने सवाल किया कि यदि इस पानी से नागरिक बीमार पड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने सभा में गंदे पानी की बोतल दिखाकर स्थिति की गंभीरता को उजागर किया, जिससे सदन में हलचल मच गई।
इस पर महापौर एडवोकेट हर्षाली चौधरी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने वडवली और अटाली क्षेत्रों में भी जल संकट गंभीर होने की बात स्वीकार करते हुए त्वरित समाधान पर जोर दिया। कई पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे बेमियादी आंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच, नगर निगम आयुक्त अभिनव गोयल ने भरोसा दिलाया कि स्थिति से निपटने के लिए विशेष टीम गठित की जा रही है। यह टीम हर वार्ड में जाकर अवैध जल कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें हटाएगी और पानी की बर्बादी रोकने के उपाय लागू करेगी। फिलहाल, शहर में ‘पानी पर राजनीति’ तेज हो गई है, लेकिन राहत कब मिलेगी—यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।