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बच्चू कडू का शिवसेना में प्रवेश, सियासी समीकरणों में हलचल

by trilokvivechana
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में भगवा धारण, विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारी का ऐलान

मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब प्रहार संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष बच्चू कडू ने शिवसेना का दामन थाम लिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में बच्चू कडू ने औपचारिक रूप से भगवा झंडा हाथ में लेकर पार्टी में प्रवेश किया। इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बच्चू कडू के सामाजिक और जनआंदोलन से जुड़े लंबे संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि कडू ने किसानों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों के हक के लिए लगातार सड़क पर उतरकर आवाज उठाई है, जिससे उन्होंने समाज में अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाई है।

शिंदे ने कहा कि किसान कर्जमाफी जैसे मुद्दों पर बच्चू कडू के आंदोलनों का सीधा असर पड़ा और सरकार को अहम फैसले लेने पड़े। उन्होंने इसे जनसंघर्ष की ताकत का उदाहरण बताते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ लड़ना शिवसेना की मूल विचारधारा का हिस्सा है, जिसकी नींव बालासाहेब ठाकरे ने रखी थी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चू कडू और उनके विचारों में काफी समानता है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए सामाजिक आंदोलनों को राजनीतिक ताकत से जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने कडू और उनके सहयोगियों का पार्टी में स्वागत किया। साथ ही शिंदे ने बच्चू कडू को आगामी विधान परिषद चुनाव के लिए शिवसेना का उम्मीदवार घोषित कर दिया।

इस मौके पर उद्योग मंत्री उदय सामंत, शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारी संजय मोरे, विधायक मुरजी पटेल सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बड़ी संख्या में प्रहार संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और दिव्यांग समाज के सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे आयोजन का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बच्चू कडू का शिवसेना में शामिल होना केवल एक दल परिवर्तन नहीं, बल्कि जनआंदोलन की राजनीति और मुख्यधारा की सत्ता के बीच नए समीकरणों की शुरुआत है। आने वाले समय में यह गठजोड़ चुनावी रणनीति और सामाजिक आधार दोनों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इसका असर आगामी चुनावों में किस रूप में सामने आता है।

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